जयपुर, जेएनएन। राजस्थान के रणथंभौर अभयारण्य में दिवाली पर बाघिन टी-8 अपने तीन शावकों के साथ नजर आई। टी-़8 के शावक होने की सूचना तो पहले आ चुकी थी, लेकिन पहले दो ही शावक होने की बात सामने आई थी। अब बाधिन तीन शावकों के साथ नजर आई। बाघिन के साथ तीन शावकों का ये नजारा देख पर्यटक रोमांचित हो। बाघिन जंगल जोन छह पर बना ट्रेक पार कर रही थी।

उल्लेखनीय है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व में क्षमता से ज्यादा बाघ हो चुके हैं। रणथंभौर में इन शावकों के साथ बाघों की तादाद 71 के पार जा पहुंची है, जबकि यहां अधिकतम 40 बाघ रहने लायक ही क्षेत्र है। इसी के कारण करीब 15 से 16 बाघ रणथंभौर के जंगल की सरहदों के आसपास घूम रहे हैं। 

राजस्थान के रणथंभौर अभयारण्य में इलाज के दौरान बाघ टी-109 (वीरू) की मौत हो चुकी है। इलाके के लिए दूसरे बाघ टी-42 के साथ हुए संघर्ष (टेरीटरी फाइट) में यह बाघ घायल हो गया था। 30 सितंबर से ही इलाज के लिए वीरू को पिंजरे में बंद रखा गया था। उसके शरीर पर करीब 50 घाव थे, जिनमें संक्रमण हो गया था। इलाज के दौरान बाघ ने गुरवार शाम को दम तोड़ दिया।

ढाई साल के इस बाघ वीरू को बाघिन टी-8 ने जन्म दिया था। इसका पिता टी-34 था। इसके साथ जन्मे दूसरे नर बाघ का नाम जय है। इस तरह यह फिल्म शोले के जय-वीरू जैसी जोड़ी थी। वीरू मां के साथ कुंडाल वन क्षेत्र में आ गया था और अब अपने लिए अलग इलाके की तलाश में भटक रहा था। जंगल की सीमा पर टेरीटरी की खोज में इसका मुकाबला भेरपुरा इलाके में बाघ टी-42 से हो गया।

इसकी उम्र करीब 11 साल है। दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष में वीरू घायल हो गया और दौलतपुरा के पास आंवला के फार्म में घुस गया। वन विभाग ने इसे वहां से रेस्क्यू किया और पिंजरे में रखकर इसका उपचार शुरू किया गया। 30 सितंबर से जारी इलाज के दौरान उसे एक बार एक बार पहले और दूसरी बार गुरवार को ट्रैंक्यूलाइज किया गया। इसी दौरान उसकी मौत हो गई।

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Posted By: Sachin Mishra

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