जयपुर, मनीष गोधा। राजस्थान में इतिहास अपने आपको दोहरा रहा है। विधानसभा चुनाव से लेकर बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने तक के घटनाक्रम को देख कर ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 2008 से 2013 के कार्यकाल के रीमेक चल रहा है, बस कुछ चेहरे बदले, स्थितियां और घटनाक्रम काफी हद तक एक जैसा हैं और यह समानता राजस्थान मे चर्चा का विषय बनी हुई है।

राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार मुख्यमंत्री बने है। उनका पहला कार्यकाल 1998से 2003 तक का था और उस समय उनके पास 150 सीटें थी, इसलिए काफी मजबूत स्थिति में थे, लेकिन 2008 से 2013 के बीच वे लगभग आज जैसी ही स्थितियों से जूझ रहे थे और उस समय भी उन्होने राजनीतिक कौशल दिखाते हुए पूरे पांच वर्ष तक सरकार चला ली थी।

उस कार्यकाल और मौजूदा कार्यकाल में विधानसभा चुनाव के पहले से लेकर बसपा विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने तक की घटनाएं बहुत हद एक जैसी है। फर्क सिर्फ इतना है कि उस समय प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सी.पी जोशी थे अभी सचिन पायलट है। बसपा के विधायकों के चेहरे भी बदले है, हालांकि इनमें राजेन्द्र गुढा पिछली बार भी थे, इस बार भी है। इनके अलावा भी बहुत कुछ ऐसा है जो राजस्थान में लोगो को गहलोत का 2008 से 2013 का कार्यकाल याद दिला रहा है।

ऐसे चल रहा है गहलोत कार्यकाल का रीमेक

- 2008 में विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ भाजपा की करारी हार की सम्भावना बताई जा रही थी, लेकिन भाजपा 78 सीट ले आई। इस बार भी ऐसा ही माना जा रहा था, लेकिन भाजपा 72 सीट ले आई

- 2008 में कांग्रेस की बडी जीत के आसार थे, लेकिन पार्टी 96 पर अटक गई। इस बार भी बडी जीत के आसार थे, लेकिन पहले 99 पर अटकी। बाद में उपचुनाव जीत कर 100 पूरे कर लिए।

- 2008 में सीपी जोशी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे और राहुल गांधी से नजदीकी के चलते उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे बडा दावेदार माना जा रहा था। इस बार सचिन पायलट अध्यक्ष है और उन्हें भी राहुल गांधी की नजदीकी के चलते ही भावी मुख्यमंत्री माना जा रहा था।

- 2008 में जोशी एक वोट से चुनाव हारे अशोक गहलोत अंतिम समय पर दावेदार बन कर सामने आए और मुख्यमंत्री बन गए। इस बार पायलट हालांकि चुनाव हारे नहीं, लेकिन गहलोत ने मजबूत दावेदारी पेश की और मुख्यमंत्री बन गए।

- 2008 विधानसभा चुनाव में बसपा के छह विधायक जीते। इनमे से ज्यादातर पूर्व कांग्रेसी थे, जिन्हें टिकट नहीं मिला तो बसपा में चले गए। इस बार भी छह विधायक जीत कर और ये भी ज्यादातर पूर्व कांग्रेसी है।

- 2008 में सरकार बनने के बाद जोशी और गहलोत की खींचतान लगातार चलती रही। कांग्रेस साफ तौर पर दो गुटों में बंटी नजर आती थी। इस बार जोशी की जगह पायलट और गुटबाजी चरम पर है।

- 2008 वाले कार्यकाल में सीपी. जोशी केन्द्र में काफी मजबूत हो गए थे। ऐसे में सरकार और खुद की मजबूती के लिए गहलोत ने बसपा विधायको को पार्टी में लिया था। इस बार भी गहलोत आतरिक दबाव महसूस कर रहेहैं और माना जा रहा है कि बसपा विधायकों के विलय से यह दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।

- 2008 में जोशी प्रदेश अध्यक्ष थे, इस बार विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका में है। ऐसे में बसपा विधायकों के विलय से उनका सम्बन्ध किसी न किसी रूप में बना हुआ है।

- बसपा की बात करें तो उस समय भी धर्मवीर अशोक राजस्थान में बसपा के प्रभारी थे और इस बार भी वे ही राजस्थान के प्रभारी है।

- विलय के तुरंत बाद गहलोत ने केबिनेट विस्तार कर बसपा से आए लोगों को सरकार में लिया था। इस बार भी इसकी चर्चाएं शुरू हो गई है।

 

Posted By: Preeti jha

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