जयपुर, जागरण संवादाता। किसानों की मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान महापंचायत के आह्वान पर रविवार को राजस्थान के 45 हजार गांव बंद रहे। कांग्रेस ने बंद को समर्थन दिया था। हालांकि अधिकांश गांवों में सुबह 11 बजे तक ही बंद का असर नजर आया और बाद में बाजार भी खुल गए। सुबह गांवों से सब्जी और दूध बाहर नहीं निकला। इस कारण शहरों में लोगों को परेशानी हुई। बांसवाड़ा, अलवर और करौली जिलों के कई गांवों में किसानों ने सड़कों पर दूध बहाने के साथ ही सब्जी भी फेंकी। किसान नेताओं ने बंद को पूरी तरह सफल बताया है।

 

जयपुर में धरने और उपवास के लिए गांधी सर्किल पहुंचे किसान नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। जिन किसान नेताओं को हिरासत में लिया गया उनमें पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह, राष्ट्रीय किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट भी शामिल थे। जाट ने कहा कि बंद को 39 संगठनों ने समर्थन दिया था। 

 

गौरतलब है कि किसानों का कर्ज पूरी तरह से माफ करने, समर्थन मूल्य को लागत मूल्य के साथ 50 फीसद लाभांश जोड़कर तय करने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर पिछले एक माह से किसान आंदोलन चलाया जा रहा है। वहीं प्रशासन का दावा है कि बंद का कोई खास असर नहीं रहा।

Posted By: Babita Kashyap

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