जागरण संवाददाता, जयपुर। साहित्य के महाकुंभ "जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल" (जेएलएफ) में फिल्म "पद्मावत" का मुद्दा लगातार चौथे दिन रविवार को भी छाया रहा। लेखिका शोभा डे ने पद्मावत को लेकर सरकार के रवैये पर ही सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि करणी सेना की धमकी से कोई फर्क नहीं पड़ता। सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी के बावजूद कुछ राज्य सरकारें अपने यहां कानून व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देकर फिल्म को रिलीज नहीं करना चाहती हैं। सरकारें कानून व्यवस्था संभाल ही नहीं पा रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री रहने का कोई हक नहीं जो अपने प्रदेश में कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पाए।

जेएलएफ में रविवार को शोभा डे का "दो वर डेज" सत्र आयोजित हुआ, जिसमें पत्रकार वीर सांघवी ने उनसे चर्चा की। शोभा डे ने कहा कि पद्मावत फिल्म मैंने देखी है, इसे देखने के बाद मैं यह कह सकती हूं कि राजपूतों को गर्व होना चाहिए। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा कि वे राजपूत समाज विरोध किस बात का कर रहा है। उन्होंने श्याम बेनेगल द्वारा निर्देशित धारावाहिक "भारत एक खोज" का हवाला देते हुए कहा कि रानी पद्मनी का किस्सा इस धारावाहिक में पहले ही दिखाया जा चुका है, लेकिन तब विरोध नहीं हुआ था, आज के दौर में केवल ऐसे विषयों पर राजनीति करने के लिए कोई ना कोई मुद्दा तैयार किया जाता है।

उन्होंने गुरुग्राम में स्कूली बच्चों की बस पर प्रदर्शनकारियों द्वारा पथराव और तोड़फोड़ किए जाने की चर्चा करते हुए कहा कि यह किस तरह का विरोध है,विरोध के नाम पर स्कूली बच्चों की बस को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुझे करणी सेना से कोई फर्क नहीं पड़ता। कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार का काम है और जो मुख्यमंत्री ऐसा नहीं कर पा रहा हैउ,उसे पद पर नहीं रहना चाहिए।

शोभा डे ने कहा कि पत्रकार गोरी लंकेश की हत्या के बाद मुझे एक व्यक्ति ने लगातार जान से मारने की धमकियां दीं। इस व्यक्ति को पीएम ट्विटर पर फोलो करते हैं, लेकिन उसे आज तक अनफालो नहीं किया। उन्होंने कहा कि मीडिया से जुड़े लोगों को जान से मारने की धमकियां मिलना आज आम बात हो गई है। वैसे तो मीडिया की आजादी पर पहले से ही हमले होते रहे हैं, उस समय मीडिया उनका मुकाबला करता था, लेकिन अब तो मीडिया बिल्कुल दंडवत हो गया है।  

गौरी लंकेश के नाम से मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार

शब्दों के संसार के नाम से प्रसिद्ध "जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल " में पत्रकार गौरी लंकेश के नाम से एक लाख रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की गई। गोरी लंकेश की पिछले वर्ष 5 सितंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, वह पत्रकारिता के साथ अभिनय भी करती थीं। गौरी लंकेश के नाम पर पुरस्कार की घोषणा उनके जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले की गई है, उनका सोमवार को जन्मदिन है। पेन दिल्ली और पेन साउथ इंडिया ने इस पुरस्कार की घोषणा की है। ये पुरस्कार लोकतंत्र के मूल्यों की रक्षा करने वाले किसी व्यक्ति अथवा संस्थान को प्रदान किया जाएगा। ये व्यक्ति या संस्थान पत्रकारिता, सामाजिक कार्यकर्ता और ब्लॉगिंग हो सकते हैं।

गौरी लंकेश कन्नड़ की क्रांतिकारी पत्रकार थी। वे बेंगलूरू से प्रकाशित होने वाली कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका लंकेश की संपादक थीं। गौरी लंकेश को साफ बात करने के लिए जाना जाता था। उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्षरत पत्रकार के रूप में पहचाना जाता था। अपने पिता पि.लंकेश की पत्रिका के साथ ही वे भी अपनी साप्ताहिक पत्रिका लंकेश पत्रिका भी निकालती थीं। 5 सितम्बर,2017 को बेंगलूरू के राजराजेश्वरी नगर में उनके घर पर अज्ञात लोगों ने बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी थी, इसके बाद देशभर में विरोध-प्रदर्शन के दौर चले थे।

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Posted By: Sachin Mishra

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