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कार में मिले सिर्फ ₹28 हजार, ACB ने बना दिया एक दिन की आय से अधिक संपत्ति का केस; राजसमंद में अनोखी कार्रवाई

Published: Sun, 20 Sep 2026 03:42 PM (IST)

राजसमंद परिवहन विभाग के सहायक प्रशासनिक अधिकारी दिनेश किलोलिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है।

(एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

(एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. राजसमंद डीटीओ के एएओ दिनेश किलोलिया पर मामला दर्ज।

  2. एसीबी ने 28,110 रुपये नकद के साथ पकड़ा।

  3. उधार का दावा झूठा पाया गया, बैंक लेनदेन भी नहीं।

डिजिटल डेस्क, जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एक कार्रवाई ने राजस्थान के राजसमंद परिवहन विभाग (DTO) में हड़कंप मचा दिया है। सिर्फ एक दिन की कमाई और खर्च का सही हिसाब न दे पाना, वहां के सहायक प्रशासनिक अधिकारी (AAO) दिनेश किलोलिया के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज होने की वजह बन गया।

एसीबी को पुख्ता सूचना मिली थी कि दिनेश किलोलिया अवैध रूप से रकम लेकर राजसमंद से उदयपुर अपने घर जा रहे हैं। इस सूचना पर एएसपी गोपाल स्वरूप मेवाड़ा के नेतृत्व में एसीबी की टीम ने श्रीनाथजी-उदयपुर नेगड़िया टोल-वे पर उनकी कार को रुकवाकर तलाशी ली। कार से 28,110 रुपये नकद बरामद हुए।

कार में उनके साथ मनमोहन सिंह नाम का एक शख्स भी मौजूद था, जिसने खुद को ड्राइवर बताया और कहा कि वह ऑफिस के कामों के अलावा आरटीओ से जुड़े अन्य छोटे-मोटे काम करके अतिरिक्त कमाई करता है।

उधार का दावा निकला झूठा

एसीबी ने जब दिनेश किलोलिया से इन पैसों के बारे में पूछताछ की, तो उन्होंने दावा किया कि इसमें से 26,500 रुपये उन्होंने कार का बीमा (इंश्योरेंस) कराने के लिए आरटीओ ऑफिस के पास स्थित ई-मित्र संचालकों से उधार लिए थे।

जब अधिकारियों ने पूछा कि पैसे किससे उधार लिए, तो वे सिर्फ 'बहादुर सिंह' का नाम बता पाए, लेकिन यह भी नहीं बता सके कि उससे कितने रुपये लिए हैं। एसीबी ने जब बहादुर सिंह से संपर्क किया, तो उसने सिर्फ 2-3 हजार रुपये ही देने की बात कही। इस तरह किलोलिया का 26,500 रुपये उधार लेने का दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ।

बैंक खाते में नहीं मिला कोई लेन-देन

एसीबी ने जब उनके बैंक खाते की जांच की, तो 10 जुलाई से 3 अगस्त के बीच खाते में कोई भी लेन-देन नहीं पाया गया। इसके अलावा, किलोलिया के पास वाहनों के रजिस्ट्रेशन, ड्राइविंग लाइसेंस, फिटनेस और भारी-भरकम राजस्व वसूली जैसे अहम कार्य थे।

इन तमाम पहलुओं, बरामद पैसों का संतोषजनक हिसाब न मिलने और बैंक स्टेटमेंट के आधार पर एसीबी ने 3 अगस्त को ही 'चेक पीरियड' (जांच की अवधि) मानकर उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर लिया है।