जागरण संवाददाता,जयपुर।राजस्थान में बाघों की सटीक लोकेशन के लिए वन विभाग के कर्मचारियों को अब एंटीना लेकर जंगलों में नहीं घूमना पड़ेगा। अब वे एक स्थान पर बैठकर ही बाघ की सटीक लोकेशन की जानकारी कर सकेंगे। इसके लिए वन विभाग अब जीपीएस तकनीक वाले नये रेडियो कॉलर इस्तेमाल करेगा।

नया रेडियो कॉलर मजबूत होगा। यह वजन में कम और ज्यादा बैटरी लाइफ वाला होगा। इसे एक बार बाघ के लगाने के बाद में अगले दो साल तक उसकी सटीक लोकेशन ली जा सकेगी। नई तकनीक वाले रेडियो कॉलर लगाने की शुरूआत सरिस्का अभयारण्य में बाघ एसटी-13 और एसटी-9 के साथ शुरू कर दी गई है।

कुछ समय पूर्व सरिस्का के जंगल में बाघिन एसटी-5 ऐसी गायब हुई है कि उसकी अभी तक कोई जानकारी ही नहीं मिल पा रहा है. पिछले दिनों लगाये गए करीब 500 कैमरों के 10 लाख फोटो खंगालने के बाद में उसका कोई पता नहीं चल पाया है।

इससे पहले वन विभाग वीएचएफ तकनीक के रेडियो कॉलर इस्तेमाल करता था। उसके सिग्नल रिसीव करने के लिए खुद वनकर्मियों को एंटीना लेकर जंगल में घूमना पड़ता था। जीपीएस तकनीक में वन विभाग को बाघ की सटीक लोकेशन सीधे जीपीएस या मोबाइल पर मिल सकेगी। ऐसे में वनकर्मियों को बाघ की लोकेशन मिलने के बाद में बाघ को ट्रेक करना आसान होगा। 

Posted By: Preeti jha