जोधपुर, संवाद सूत्र । देश की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर वीर शहीदों के प्रतिमा स्थलों पर राखी के दिन बहनों द्वारा रक्षा सूत्र बांधने का नजारा लोगों की आंखों में पानी ला देता है। एक तरफ सम्मान और दूसरी तरफ जिम्मेदारी के बीच बहनों का अपने भाइयों के प्रति जो प्रेम है, वह रक्षाबंधन के दिन प्रतीत होता है। राजस्थान विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में अलग-अलग इससे ऐसी कई तस्वीरें सामने आती है जो कि राजस्थान के जवानों की शहादत को अमर कर देती है। त्योहारों पर बहनों का रक्षा पर्व पर भाइयों की प्रतिमा की कलाई पर बांधी गई राखी इस सम्मान का सूचक है।

सोशल मीडिया पर ऐसी कई पोस्ट वायरल हो रही है, राजस्थान की माटी से जुड़ी महिलाएं अपने भाई के बलिदान पर गर्व महसूस करती हुई उनकी प्रतिमाओं की कलाइयों पर या समाधि स्थल पर जाकर राखी बांधते हुए दिखाई दे रही हैं। ऐसी ही एक तस्वीर जोधपुर के ओसियां क्षेत्र के खुडियाला गांव से वायरल हुई है जहां जाट रेजीमेंट के अमर शहीद गणपत राम कड़वासरा के प्रतिमा पर एक महिला के द्वारा राखी बांधी जा रही है गणपत राम कड़वासरा खुडियाला गांव के निवासी थे और जम्मू कश्मीर में दुश्मनों से लड़ते हुए वर्ष 2017 में शहीद हो गए इसके बाद से गांव में ही उनका स्मारक बनाया गया है और हर एक राखी के त्योहार पर उनकी बहने वहां आकर पूजा करती हैं भाई की कलाई पर राखी बांधी है और भाई के बलिदान पर फक्र भी महसूस करती है।

ऐसी ही दूसरी तस्वीर एक जोधपुर के खेजड़ला गांव से वायरल हो रही है, जहां शहीद लक्ष्मण पिचकिया के समाधि स्थल पर गांव की ही बेटी सुमन ओझा के द्वारा राखी बांध ने की तस्वीर वायरल हुई है। सुमन के अनुसार लक्ष्मण उनके गांव के निवासी थे और उसे इस बात का फक्र है कि वह भी उसी गांव की बेटी है ।हालांकि वह उनके परिवार या जाति की तो नहीं है लेकिन फिर भी गांव की बेटी होने का फर्ज और लक्ष्मण की बहन होने का फर्ज निभाते हुए रक्षाबंधन की परिभाषा को लक्ष्मण के द्वारा पूरा किए जाने का गुमान उसको भी है ।

इसी क्रम में वह भी शहादत के सम्मान में राखी बांधने पहुंची है और तस्वीर पर राखी बांध लक्ष्मण के किए गए काम को याद करती है। खेजड़ला गांव का लक्ष्मण जाट रेजीमेंट का सिपाही था और जम्मू कश्मीर के राजौरी में हुई मुठभेड़ में वर्ष 2021 को शहीद हो गया था।

यह पल वही है जो भारत को अविश्वसनीय बनाता है। त्योहार में दुख की याद दिलाता है तो अगले ही पल में गर्व की अनुभुति करवाता है। जहा एक ओर भाई को खोने का दुख है तो वही दूसरी ओर रक्षा करते हुए कुर्बानी दिए जाने का गर्व भी है ।

Edited By: Priti Jha