बच्चों के यौन शोषण सामग्री पर बड़ी कार्रवाई: 15326 मोबाइल नंबर और 7800 URL ब्लॉक, राजस्थान के 7 जिलों में FIR
राजस्थान पुलिस ने बच्चों के यौन शोषण सामग्री (CSEAM) के ऑनलाइन प्रसार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 15,326 मोबाइल ...और पढ़ें

बच्चों के यौन शोषण सामग्री पर बड़ी कार्रवाई। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)
HighLights
15,326 मोबाइल नंबर, 7,800 URL और 100 डिवाइस ब्लॉक किए गए।
बच्चों के यौन शोषण सामग्री के ऑनलाइन प्रसार पर बड़ी कार्रवाई।
राजस्थान के 7 जिलों में FIR दर्ज, NCMEC रिपोर्ट आधार।
डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान पुलिस ने बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मटीरियल (CSEAM) के ऑनलाइन फैलाने से कथित तौर पर जुड़े 15,326 मोबाइल नंबर, लगभग 7,800 URL और प्रोफाइल तथा 100 डिवाइस को ब्लॉक कर दिया है।
पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर अपराध) वीके सिंह ने बताया कि पुलिस को ऐसी ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ी लगभग 25,000 सूचनाएं मिली हैं और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण करने के बाद कार्रवाई की जा रही है।
7 जिलों में FIR दर्ज
उन्होंने यहां पुलिस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 'नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन' (NCMEC) से मिली टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर चुरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तोड़गढ़ के पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए गए हैं।
सिंह ने कहा कि NCMEC टिपलाइन रिपोर्ट के आधार पर बार-बार अपराध करने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी CSEAM फैलाने के लिए टेलीग्राम और डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर गुप्त और पेड़ ग्रुप या चैनल का इस्तेमाल कर रहे थे।
नकली पहचान का इस्तेमाल कर रहे यूजर
उन्होंने कहा कि यूजर नकली पहचान का इस्तेमाल करके ऐसे ग्रुप में शामिल होते हैं और डायरेक्ट मैसेज के जरिए मटीरियल का आदान-प्रदान करते हैं। कुछ मामलों में, मटीरियल को गूगल ड्राइव या अन्य क्लाउड स्टोरेज सेवाओं पर अपलोड किया जाता है और केवल लिंक शेयर किए जाते हैं।
पुलिस ने बताया कि संदिग्ध अकाउंट, मोबाइल नंबर और डिवाइस की पहचान करने के लिए NCMEC रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों के तकनीकी विश्लेषण का इस्तेमाल किया जा रहा था।
POCSO एक्ट के तहत एक्शन की तैयारी
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे कंटेंट को डाउनलोड, स्टोर या शेयर करने के बजाय उसकी रिपोर्ट करें और चेतावनी दी कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मटीरियल को अपने पास रखने और उसे फैलाने पर POCSO एक्ट, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट और अन्य लागू कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अधिकारी ने कहा कि ऐसी गतिविधियों की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन, साइबर हेल्पलाइन 1930 या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दी जा सकती है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
