जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने सिलिकोसिस नीति जारी कर दी है। सिलिकोसिस नीति जारी करने वाला हरियाणा के बाद राजस्थान देश में दूसरा राज्य है। नीति में प्रावधान किया गया है कि सिलिकोसिस पीड़ित व्यक्ति के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार तीन लाख रुपये की सहायता देगी। पीड़ित की मौत पर उत्तराधिकारी को दो लाख रुपये व अंतिम संस्कार के लिए दस हजार रुपये की सहायता दी जाएगी।

सिलिकोसिस पीड़ित को मुख्यमंत्री विशेष योग्य जन पेंशन का लाभ मिलेगा। इसके तहत चार हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी। पीड़ित की मौत होने पर उसकी पत्नी को विधवा पेंशन और पालनहार पेंशन योजना का लाभ मिलेगा। विधवा पेंशन के तहत महिला को 750 रुपये प्रतिमाह और पालनहार योजना के तहत बच्चों के 18 साल तक का होने पर दो हजार रुपये प्रतिमाह सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नीति में प्रावधान किया गया है कि सिलिकोसिस पीड़ित के परिवार के सदस्यों को आस्था योजना के तहत नि:शुल्क चिकित्सा व राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। नि:शुल्क चिकित्सा में दवा से लेकर जांच तक सबकुछ फ्री होगा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में सिलिकोसिस नीति जारी की। नीति में प्रावधान किया गया है कि खदान में मिट्टी अधिक नहीं उड़े इसके लिए मालिक को बंदोबस्त करना होगा। डस्ट से बचाव के लिए उपकरण लगाने को लेकर गाइडलाइन तय की गई है। सिलिकोसिस से मुक्ति के लिए राज्य सरकार जागरूकता अभियान चलाएगी, ताकि मजदूर बचाव के उपाय कर सकें। नीति के तहत पीड़ितों और उनके आश्रितों को स्किल डवलपमेंट ट्रेनिंग देने का अभियान चलाया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, राजस्थान में 33 हजार से अधिक खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मजदूर काम करते हैं। खदानों में पत्थर तोड़ने और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान डस्ट उड़ने से सिलिकोसिस जैसी जानलेवा बीमारी हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 11 हजार से अधिक लोग सिलिकोसिस से पीड़ित हैं। वहीं, अब तक 1600 लोगों की इससे मौत हो चुकी है। सिलिकोसिस से बचाव को लेकर देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रदेश में बुलाकर जागरूकता कैंप लगाए जाएंगे।

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Posted By: Sachin Mishra

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