'बिना कारण शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता', राजस्थान हाई कोर्ट का अहम फैसला
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में पति को दिए गए विवाह विच्छेद के आदेश को बरकरार रखा है। ...और पढ़ें
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राजस्थान हाई कोर्ट का अहम फैसला (फाइल फोटो)
HighLights
शारीरिक संबंध से इनकार मानसिक क्रूरता, राजस्थान हाई कोर्ट का अहम फैसला।
आत्महत्या की धमकी देना भी मानसिक प्रताड़ना, कोर्ट ने माना।
जैसलमेर फैमिली कोर्ट के तलाक आदेश को उच्च न्यायालय ने बरकरार रखा।
जागरण संवाददाता, जयपुर । राजस्थान हाई कोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में पति को दिए गए विवाह विच्छेद के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि शारीरिक अक्षमता अथवा किसी वैध कारण के बिना लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है। कोर्ट ने आत्महत्या करने की धमकी देने के व्यवहार को भी मानसिक क्रूरता माना है।
न्यायाधीश मुन्नूरी लक्ष्मण और न्यायाधीश योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने विवाह विच्छेद को लेकर पत्नी की दो अपीलें खारिज कर दी हैं। इनमें विवाह विच्छेद के आदेश को चुनौती देने वाली अपील और हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा नौ के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली की याचिका खारिज किए जाने की अपील शामिल थीं।
दंपती की शादी वर्ष 2018 में हुई थी। पति का आरोप था कि पत्नी ने लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने से इनकार किया और आत्महत्या की धमकी दी थी। वहीं पत्नी ने इसके विपरीत पति पर क्रूर व्यवहार करने और पैसों की मांग के आरोप लगाए थे।
सर्वोच्च न्यायालय के समर घोष बनाम जया घोष और सोनल तलपद्रा बनाम वीरभान सहित विभिन्न फैसलों का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायालय ने माना कि मामले की परिस्थितियों में पत्नी का लंबे समय तक शारीरिक संबंधों से इन्कार करना और आत्महत्या की धमकी देना मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में आता है।
उल्लेखनीय है कि जैसलमेर पारिवारिक न्यायालय ने वर्ष 2024 में क्रूरता के आधार पर पति को विवाह विच्छेद देने का आदेश दिया था। पत्नी ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। बता दें कि पति जैसलमेर जिले में कुल्फी बनाने का काम करता है। वहीं, पत्नी जैसलमेर नगर परिषद में कनिष्ठ लेखाकार है।
