राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण को बताया सही, आयोग की रिपोर्ट का दिया हवाला
राजस्थान सरकार ने स्थानीय निकाय और आगामी पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को उच्च न्यायालय में सही ठहराया है।

राजस्थान सरकार ने ओबीसी आरक्षण को सही बताया।
HighLights
सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण को सही ठहराया।
उच्च न्यायालय में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया गया।
याचिकाकर्ता ने आनुपातिक आरक्षण न मिलने का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता,जयपुर। राजस्थान सरकार ने हाल ही में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव और आगामी पंचायत चुनाव में तय किए गए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को सही ठहराया है।
उच्च न्यायालय में सरकार की ओर से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर लॉटरी के जरिए चुनाव में ओबीसी आरक्षण का फैसला किया गया है।
13 अगस्त को जिला परिषद में जिला प्रमुख पदों के लिए आरक्षण की लाटरी निकाली गई थी, जिसमें 41 जिलों में से पांच जिला प्रमुख के पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुए थे।
लॉटरी के बाद ओबीसी आरक्षण कम दिए जाने को लेकर लगे आरोपों के बाद सरकार ने लाटरी स्थगित कर दी थी। इसके बाद सरकार ने 17 और 18 सितंबर को फिर से लाटरी की तारीख तय की थी, लेकिन अब निकाय चुनाव का हवाला देते हुए मंगलवार को एक बार फिर स्थगित कर दिया गया।
सरकार ने जवाब में कहा कि ओबीसी आयोग ने घर-घर सर्वे करवा कर जनाधार के उपलब्ध डेटा का अध्ययन करके ही ओबीसी आरक्षण की सिफारिश की थी।
उल्लेखनीय है कि सामाजिक कार्यकर्ता राधेलाल गोदारा ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने जिला परिषद पुनर्गठन और नए जिलों के गठन के बाद जिला प्रमुख के कुल पदों की संख्या 33 से बढ़ाकर 41 कर दी है।
इसके बावजूद पदों के अनुपात में ओबीसी को नियमानुसार और आनुपातिक आरक्षण का लाभ नहीं मिला है। इस पर उच्च न्यायालय ने सरकार से जवाब मांगा था।
