मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जागरण संवाददाता, जयपुर। दिल्ली के सिविल लाइंस में स्थित 1500 करोड़ रुपये की कीमत वाले उदयपुर हाउस को राजस्थान सरकार ने कब्जे में ले लिया है। अब तक इस पर दिल्ली सरकार का कब्जा था। करीब 12 हजार वर्गमीटर में फैले उदयपुर हाउस का कब्जा राजस्थान सरकार को सौंपने को लेकर दिल्ली सरकार ने दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में सहमति पत्र पेश किया था। दिल्ली सरकार ने सोमवार शाम को उदयपुर हाउस का कब्जा राजस्थान सरकार को सौंप दिया।

मंगलवार सुबह दिल्ली में राजस्थान सरकार की अतिरिक्त आवासीय आयुक्त प्रतिभा सिंह ने उदयपुर हाउस पहुंचकर रिजर्व पुलिस बल के जवान तैनात करने के निर्देश दिए। उदयपुर हाउस में मंगलवार से एक दर्जन पुलिस के जवान सुरक्षा के लिए तैनात किए गए हैं। राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने बताया कि आजादी के बाद तत्कालीन राज्य सरकार ने उदयपुर हाउस दिल्ली सरकार को किराये पर दिया था। दिल्ली सरकार ने साल 1965 तक तो किराया दिया, लेकिन बाद में बंद कर दिया।

राजस्थान सरकार की तरफ से इस बारे में लगभग हर दूसरे माह दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर किराया देने का आग्रह किया गया। लेकिन दिल्ली सरकार ने इस मामले में कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया। इस पर करीब डेढ़ दशक पहले राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उदयपुर हाउस खाली कराने का आग्रह किया। सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला दोनों सरकारों को आपसी सहमति से निपटाने के निर्देश दिए थे। लंबी सुनवाई के बाद पांच अगस्त को दिल्ली सरकार ने उदयपुर हाउस का कब्जा राजस्थान सरकार को सौंपने पर सहमति जताई।

इस दौरान राजस्थान के अधिकारी लगभग प्रत्येक सप्ताह दिल्ली जाकर वहां के अधिकारियों से मिलते रहे। आखिरकार दिल्ली सरकार ने उदयपुर हाउस का कब्जा राजस्थान को सौंपने को लेकर दो दिन पहले सहमति पत्र पेश किया और सोमवार शाम को उसे खाली कर दिया। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने बताया कि अब उदयपुर हाउस का क्या उपयोग करना है, इस बारे में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत निर्णय लेंगे ।

 

Posted By: Sachin Mishra

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