जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान सरकार के हेलीकॉप्टर का कोई खरीददार नहीं मिल रहा है। पिछले 10 साल में 12 बार प्रयास करने के बावजूद सरकार के हेलीकॉप्टर अगस्ता एडब्लयू-109 ई पॉवर को खरीदने कोई नहीं आ रहा। सरकार ने निलामी में लगातार इसको बेचने की रकम कम की, लेकिन सफलता नहीं मिली। हालात यह है कि 16 साल पहले 30 करोड़ में खरीदे गए इस हेलीकॉप्टर को सरकार साढ़े 4 करोड़ में बेचने को तैयार है। लेकिन कोई इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा। खरीददार नहीं मिलने के कारण स्टेट हैंगर पर खड़ा हेलीकॉप्टर कबाड़ में तब्दिल हो रहा है।

इस साल अब तक के साढ़े तीन माह में तीन बार नीलामी करने के प्रयास किए, सामान्य प्रशासन एवं नागरिक उड्यन विभाग के अधिकारियों ने कई फर्माें से संपर्क किया, लेकिन कोई खरीददार नहीं मिला। दो दिन पहले तय की गई नीलामी की तारीख को लेकर सरकार को उम्मीद थी कि इस बार तो उसकी समस्या खत्म हो ही जाएगी,लेकिन ऐसा नहीं हुआ । इस साल 3 और 24 मार्च के बाद अब 7 अप्रैल को निलामी के प्रयास हुए हैं। करीब 7 साल पहले इसी हेलीकॉप्टर के 18 करोड़ रूपए मिल रहे थे, लेकिन तब अधिक कीमत मिलने की उम्मीद में सरकार ने इसे नहीं बेचा था । इसके बाद तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार ने 14 करोड़ में नीलामी रखी गई,फिर 12 करोड़ 40 लाख और इसके बाद 11 करोड़ करोड़ में हेलीकॉप्टर बेचने की कोशिश कई बार हुई,लेकिन सफलता नहीं मिल सकी । अब तो कोई साढ़े 4 करोड़ में भी खरीदने को तैयार नहीं है ।

तकनीकी खराबी के कारण सीएम की जान को हुआ था खतरा

तत्कालीन वसुंधरा रजे सरकार ने साल,2005 में वेस्टलैंड कंपनी से अगस्ता ए-109 डबल इंजन का हेलीकॉप्टर खरीदा था । उस समय अगस्ता वेस्टलैंड कंपनी के प्रतिनिधियों ने सरकार को विश्वास दिलाया था कि यह राजस्थान के रेगिस्तान और गर्म हवाओं के अनुकूल है। इसमें 2 क्रू मेंबर्स एवं 5 अन्य सहित कुल 7 लोगों के बैठने की क्षमता है । इसका रजिस्ट्रेशन नंबर वीटी-राज है । इसने कुल 5121 घंटे उड़ान भरी है । लेकिन इसकी पंखूड़ी कैप उखड़ने के बाद कंपनी ने इसे धूलभरी आंधी कारण बताते हुए सहायता करने से इंकार कर दिया । कंपनी ने इसमें तकनीकी खराबी बताया था । उल्लेखनीय है कि साल,2011 में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री के रूप में अपने दूसरे कार्यकाल में इसी हेलीकॉप्टर में यात्रा कर रहे थे । बीच रास्ते में हेलीकॉप्टर की पंखुड़ी का कैप उखड़ने के कारण चूरू जिले के एक गांव में आपात लैंडिंग करानी पड़ी थी । गहलोत बाल-बाल बचे थे । इसके बाद इसे वीआईपी यात्रा के लिए बंद कर दिया और बेचने के प्रयास शुरू हुए । लेकिन कई बार कोशिश के बावजूद अब तक सफलता नहीं मिली । 

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