जयपुर, जेएनएन। राजस्थान भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष सतीश पुनिया ने कहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) देश ही नहीं, बल्कि दुनिया को दिशा देने की ताकत रखता है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि आज भारत माता की जयकार और वंदेमातरम गूंजता है और तिरंगे को जो मान मिलता है, उसमें संघ का बड़ा योगदान है। सतीश पूनिया संघ के स्वयसेवक रहे हैं और अपनी राजनीति की शुरुआत उन्होंने अखिल भारतीय विदयार्थी परिषद से की थी।

अध्यक्ष बनने के बाद रविवार को भाजपा मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी के उद्घाटन के मौके पर मीडिया से बातचीत में राष्ट्रनिर्माण में संघ की भूमिका पर उन्होंने कहा कि अगर संघ नहीं होता तो शायद देश नहीं होता। सबको पता है देश का विभाजन किसने कराया है, लेकिन संघ ने राष्ट्रीयता की भावना और संस्कारों की अलख जगाई है। संघ से राष्ट्रीय स्वाभिमान की धमक पूरी दुनिया में बढ़ी हैं। संघ ने ही बहुसंख्यक हिंदुओं की चेतना जागृत की है। दीनदयाल जयंती आयोजन के सवाल पर पूनिया ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि कांग्रेस सरकार जयंती नहीं मनाएगी, लेकिन भाजपा महात्मा गांधी की 150 वीं वर्षगांठ जरूर मनाएगी।

गौरतलब है कि राजस्थन भाजपा के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति के पीछे भी संघ से उनका जुड़ाव अहम कारण माना जा रहा है। ऐसे में उनके इस बयान को राजस्थान भाजपा में संघ के बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। राजस्थान भाजपा में वर्ष 2003 से लेकर 2018 के विधानसभा चुनाव तक पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके समर्थक हावी रहे हैं और राजस्थान में पार्टी राजे और संघनिष्ठ नेताओं के बीच बंटी नजर आती रही है। अब पुनिया के आने के बाद यह माना जा रहा है कि पार्टी में राजे और उनके समर्थकों का वर्चस्व खत्म होगा तथा एक बार फिर संघनिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रभाव बढ़ेगा।

80 दिन बाद मिला राजस्थान भाजपा को अध्यक्ष
राजस्थान भाजपा को आखिर 80 दिन बाद उसका नया अध्यक्ष मिल गया। आमेर से भाजपा के विधायक और पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा के नए अध्यक्ष बने हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उनकी नियुक्ति की है। सतीश पुनिया संघ पृष्ठभूमि के नेता माने जाते हैं। जातिगत समीकरणों के हिसाब से देखा जाए तो राजस्थान मेंभाजपा ने दूसरी बार किसी जाट नेता को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी हैै।

राजस्थान में भाजपा के अध्यक्ष मदनलाल सैनी का 24 जून को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से ही यह पद खाली पड़ा था। इस बीच, पार्टी का सदस्यता अभियान भी चला और अब संगठन चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। माना जा रहा था कि संगठन चुनाव के बादही अध्यक्ष की नियुक्ति होगी, लेकिन राजस्थान में दो विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव और नवंबर में होने वाले निकाय चुनाव को देखते हुए अध्यक्ष पद पर नियुक्ति जरूरी मानी जा रही थी। अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से पार्टी में गुटबाजी बढने की आशंका पैदा हो गई थी। 18 सितंबर को निकायों की आरक्षण लाॅटरी खुलने के साथ ही निकाय चुनाव की गहमागहमी शुरू हो जाएगी और प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने तक का सारा काम अभी शुरू होना है। यही कारण है कि संगठन चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी गई है।

संघ की पसंद, लो प्रोफाइल नेता

सतीश पुनिया की नियुक्ति से अब पार्टी में संगठन को महत्व मिलने की संभावना बताई जा रही है। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद बताया जा रहा है। पुनिया अखिल भारतीय विदयाथी परिषद से जुड़े रहे हैं। राजस्थान विश्वविदयालय में छात्रसंघ का चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जो लो प्रोफाइल रह कर संगठन का काम करते हैं। उन्हें युवा कार्यकर्ताओं का काफी अच्छा समर्थन प्राप्त है।

लंबे समय तक पार्टी के प्रदेश महामंत्री, उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा के अध्यक्ष, प्रवक्ता जैसे पदों पर रह चुके हैं। वे मूलत चूरू जिले के रहने वाले हैं और वर्ष 2000 में चूरू की सादुलपुर सीट से उपचुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके बाद उन्होंने अपना कार्यक्षेत्र जयपुर जिले की आमेर सीट को बनाया और यहीं से दो बार चुनाव लड़ा। वर्ष 2013 में त्रिकोणीय संघर्ष के चलते हार गए थे, लेकिन इस बार जीत गए है और अभी विधायक होने के साथ ही पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता भी हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के समय बनाई गई लगभग सभी महत्वपूर्ण समितियों के वे सदस्य रहे हैं। हाल में पार्टी के सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक भी रहे हैं।

दूसरी बार जाट नेता को मौका

जातिगत हिसाब से देखा जाए तो पार्टी ने वसुंधरा राजे के बाद दूसरी बार किसी जाट नेता को पार्टी की कमान सौंपी है। राजे वैसे सिंधिया परिवार की है, लेकिन उनकी शादी धौलपुर के जाट परिवार में हुई थी, इस लिहाज से उन्हें जाट परिवार से माना जाता है। वहीं, पुनिया दूसरे जाट नेता हैं, जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया है। अध्यक्ष पद की दौड़ में इस बार विधानसभा में उपनेता राजेन्द्र राठौड, सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड, सीपी जोशी, विधायक वासुदेव देवनानी और मदन दिलावर के भी नाम थे, लेकिन राजपूत समुदाय से गजेन्द्र सिंह शेखावत केंद्र में मंत्री बनाए जा चुके हैं, वहीं अनुसूचित जाति वर्ग से अर्जुन मेघवाल भी केंद्र मे मंत्री हैं। ऐसे में जाट या ब्राह्मण समुदाय में से किसी को कमान सौंपी जाने की संभावना थी, लेकिन कमान पूनिया को मिली।

राजे ने दी बधाई

पूनिया के अध्यक्ष बनाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें बधाई दी है और कहा है कि पुनिया जमीन से जुड़े कार्यकर्ता है। उनके अध्यक्ष बनने से पार्टी में नई उर्जा का संचार होगा।

जाट समुदाय के हैं पुनिया

पुनिया कुशल संगठक हैं, इसीलिए उन्हें राजस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। हाल ही में मदनलाल सैनी के निधन से अध्यक्ष पद खाली हुई थी। 55 वर्षीय पुनिया चुरू जिले के राजगढ़ के रहने वाले हैं। वह राजस्थान के पश्चिमी हिस्से में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जाट समुदाय के हैं। हालांकि यह वर्ग कभी भाजपा का परंपरागत वोट बैंक नहीं रहा है, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव में जाटों ने भाजपा का बड़ी तादाद में समर्थन किया है।

राजस्थान की अन्य खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Posted By: Sachin Mishra

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप