जयपुर, जागरण संवाददाता। राजस्थान राज्य उपभोक्ता संघ (कानफैड) में दो वरिष्ठ प्रबंधकों एवं सात कर्मचारियों के फर्जी डिग्री से नौकरी करने के मामले को लेकर सरकार हरकत में आई है। कानफैड ने तीन दिन के अंदर सभी प्रबंधकों एवं कर्मचारियों से उनके शैक्षणिक मूल दस्तावेज मांगे है।

उधर कानफैड की महाप्रबंधक नें एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कॉनफैड में भर्ती घोटाला से लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों की डिग्रियों को फर्जी बताया है। यह रिपोर्ट सोमवार को सरकार को भेजी जाएगी। कानफैड महाप्रबंधन दिव्या खंडलेवाल ने बताया कि यहां कर्मचारी समचार पत्रों में विज्ञप्ति जारी किए बिना ही अपांइट हुए थे। अब तक की जांच में सामने आया है कि 29 लोग भर्ती हुए थे। इनमें से अधिकांश के पास पद के लिए निर्धारित न्यूनतम योग्यता नहीं है,वहीं कुछ की मार्कशीट फर्जी है। सर्विस बुक से मूल दस्तावेज गायब है।

वरिष्ठ प्रबंधक योगेंद्र शर्मा और राजेंद्र सिंह शेखावत के पास भी याेग्यता प्रमाण पत्र नहीं थे। इसके बावजूद दोनों ने नौकरी से लेकर पदो​न्नति तक ले ली। ये अफसर 16- सीसी चार्जशीट भुगत चुके है लेकिन नियमित वेतन वृद्धियां कभी नहीं रूकी। भर्ती हुए कर्मचारियों के पास तय नियम अनुसार सीए, अाईसीडब्ल्यूए, एमबीए जैसी डिग्रियां चाहिए थी। लेकिन दो वरिष्ठ प्रबंधकों एवं सात कर्मचारियों के पास ये डिग्री नहीं थी। उन्होंने फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल कर ली।

कानफैड महाप्रबधंक द्वारा ये दावा किया गया है कि भर्ती में घोटाला एवं अनियमितता हुई है। इस पर कानफैड के भर्ती मंडल से लेकर अफसर तक सवालों के घेरे में आ गए है कि इतनी गड़बड़ियां कैसे हुई। उल्लेखनीय है कि भर्ती वर्ष 1987 में हुई थी। अब उस समय भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। 

Posted By: Preeti jha

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