जयपुर, नरेंद्र शर्मा। राजस्थान की रणथंभौर सेंचूरी व इससे जुड़े केवलादेव वनक्षेत्र से 4 टाइगर पिछले तीन माह से लापता है। वन विभाग को इनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। वहीं वन्यजीव प्रेमी कोरोना महामारी व लॉकडाउन के कारण 72 दिन बंद रही सेंचूरी में इन बाघों के शिकार की आशंका जता रहे हैं।

वन्यजीव प्रेमियों ने प्रदेश के तीनों रिजर्व रणथंभौर, सरिस्का व मुकुंदरा टाइगर के बाघों के फोटो उनकी मौजूदगी के सबुत सही सार्वजनिक करने की मांग की है। रणथंभौर सेंचूरी से टाइगर फतह टी-42, रोमियो टी-6 व मोहन टी-47 पिछले चार माह से लापता है। इसी तरह केेवलादेव वन्यक्षेत्र से बाघिन टी- 92 का पिछले साढ़े तीन माह से कोई सुराग नहीं है। टी-42 व टी-47 अंतिम बार जनवरी के अंतिम सप्ताह में देखे गए थे, वहीं बाघिन टी-92 फरवरी के दूसरे सप्ताह में नजर आई थी। वहीं टी- 6 तो कई महीनों से नजर नहीं आया।

इनके बारे में वन विभाग के अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं है। चारों टाइगर के लापता होने का मामला उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद अधिकारी सक्रिय हुए हैं। शिकारियों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाने के साथ ही वनकर्मियों की टीम गठित की गई है। यह टीम निरंतर शिकारियों व वन्यजीवों पर नजर रखती है। लेकिन लापता हुए तीन टाइगर ना तो कहीं कैमरे में नजर आ रहे हैं और ना ही इस टीम को इनका सुराग मिला है। वनमंत्री सुखाराम विश्नोई ने अधिकारियों से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है।

अधिकारियों ने माना, नहीं दिखाई दे रहे टाइगर

रणथंभौर बाघ परियोजना क्षेत्र सवाई माधोपुर के वन अधिकारी मुकेश सैनी ने माना कि टी-42 व टी-47 काफी समय से दिखाई नहीं दे रहे हैं। इनकी ट्रैंकिंग के लिए कैमरे व टीम बनाई गई है। टाइगर के मूवमेंट वाले कैलादेवी, बूंदी, धौलपुर व कोटा के वन अधिकारियों को भी इनके बारे में सूचना दी गई है। सभी क्षेत्रों में ट्रेकिंग की जा रही है। कुछ दिनों पूर्व ही रणथंभौर सेंचूरी में दो बार शिकारियों को पकड़ा गया है।

लॉकडाउन में हुआ शिकार, फिर से गणना होनी चाहिए

काफी लंबे समय से टाइगर सहित अन्य वन्यजीवों के लिए काम कर रही संस्था पीपुल फाॅर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी वन्यजीव प्रेमी बाबूलाल जाजू का कहना है कि ये तीन टाइगर तो अधिकारिक रूप से गायब हुए हैं, जबकि इनकी संख्या इससे कहीं अधिक है। उन्होंने नेशनल टारल इगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी के असिस्टेंट इंसपेक्टर जनरल को पत्र लिखकर रणथंभौर व सरिस्का में बाघों की एक बार फिर गणना कराने की मांग की है।

रणथंभौर सेंचूरी में टाइगर परिवार

टाइगर 26, बाघिन 27, शावक 23 हैं। इनकी कुल संख्या 76 है। उल्लेखनीय है कि सरिस्का सेंचूरी साल, 2005 में एक बार पूरी तरह से टाइगर विहिन हो गया था। यहां एक-एक कर सभी टाइगरों का या तो शिकार हुआ या फिर आपसी संघर्ष में मारे गए थे । पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने सरिस्का में फिर से टाइगर बसाने का काम शुरू किया । वहां रणथंभौर से टाइगर भेजे गए थे । 

Posted By: Preeti jha

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