जागरण संवाददाता, जयपुर। उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड विधानसभा चुनाव के प्रचार में काम आने वाली रंग-बिरंगी सामग्री राजस्थान के पाली और बालोतरा में बनाई जा रही है। पाली और बालोतरा के सूती कपड़ा बनाने वाली इकाइयों में लाखों की संख्या में राम-नाम के दुपट्टे,गमछे,मास्क और टोपियां बनाने का आर्डर मिला है। अकेले पाली से करीब दो करोड़ रुपए की प्रचार सामग्री भेजी जा चुकी है।

बालोतरा से भी बड़ी मात्रा में कपड़े पर छपी प्रचार सामग्री भेजी गई है। पाली के कपड़ा उद्यमियों का कहना है कि पिछले एक महीने से प्रचार सामग्री तैयार की जा रही है। लगातार भेजी भी जा रही है। पाली में कपड़ा व्यापार से जुड़े कौशल दुग्गड़ का कहना है कि शहर की करीब एक दर्जन फैक्ट्रियों में चुनाव प्रचार सामग्री तैयार हो रही है। इनमें भाजपा के झण्डे, समाजवादी पार्टी की लाल टोपी तैयार की जा रही है। राजनीतिक पार्टियों के अतिरिक्त उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड़ में प्रचार-सामग्री बेचने वाले व्यापारियों ने भी यहां से राम-नाम के दुपट्टे और गमछे तैयार करवाए हैं। कुछ दुपट्टों पर भगवान राम का नाम छपवाया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश में गमछों और दुपट्टों का ज्यादा प्रचलन है। कपड़ा उद्यमी विमल कुमार नाहटा ने बताया कि भाजपा,सपा और बसपा के चिन्ह से छपे गमछे बालोतरा में तैयार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि बालोतरा से अधिकांश प्रचार सामग्री बनाने वाले लोग उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड के व्यापारियों के सम्पर्क में है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि काफी बड़ी संख्या में मास्क तैयार किए जा रहे हैं। घर-घर प्रचार के दौरान उम्मीदवार मतदाताओं को मास्क वितरित करेंगे । उद्यमी कमला सत्कार और पुखराज ने बताया कि पाली और बालोतरा के कपड़ों पर छपी हुई प्रचार सामग्री की मांग की मांग काफी है। इसका प्रमुख कारण यहां का कपड़ा अन्य कपड़ा मार्केट के बजाय सस्ता होना है।

उन्होंने बताया कि सूरत और अहमदाबाद में भी बालोतरा व पाली के कपड़े की काफी मांग रहती है। लेकिन अब चुनाव में मांग ज्यादा है। रोहित ग्रुप के किशोर सिंघवी ने बताया कि उत्तरप्रदेश चुनाव के लिए दस लाख मीटर कपड़े का आर्डर मिला है। भीलवाड़ा की कपड़ा फैक्ट्रियों से भी पीछे दो सप्ताह में उत्तरप्रदेश और उत्तराखण्ड में काफी कपड़ा गया है। इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष कैलाश व्यास ने बताया कि हमेशा ही चुनाव के दिनों हमेशा ही भीलवाड़ा के कपड़ों की मांग रहती है। 

Edited By: Priti Jha