उदयपुर, संवाद सूत्र। Protest In Dungarpur: राजस्थान में डूंगरपुर जिले की कांकरी डूंगरी से शुरू हुए आदिवासियों के प्रदर्शन की आग दूसरे दिन शुक्रवार को उदयपुर जिले तक पहुंच गई। प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर जिले के खेरवाड़ा क्षेत्र में उत्पात मचाते हुए रोडवेज की तीन बसें फूंक दीं। डूंगरपुर जिले में सात ट्रकों सहित कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कई वाहनों से सामान और शराब से भरा ट्रक लूट लिया। एक पेट्रोल पंप और दो होटलों में लूटपाट की। ऐसे में चौबीस घंटे से ज्यादा समय से उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे जाम है। ट्रकों की लगी लाइन लगी हैं। लगातार दूसरे दिन भी पुलिस वालों पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया है। उधर, जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि हिंसक प्रदर्शन करना हमारा काम नहीं है।

गौरतलब है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में जनजाति बहुल क्षेत्र में रिक्त रहे सामान्य वर्ग के 1167 पदों को जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों से भरे जाने की मांग को लेकर डूंगरपुर में आदिवासी कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे। ये आदिवासी गुरुवार को महापड़ाव के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या आठ पर उतर आए थे। इस दौरान पुलिस ने खदेड़ने की कोशिश की तो उन्होंने पथराव शुरू कर दिया था। इसमें कई पुलिस वाले घायल हुए थे। गुरुवार रात को भी करीब पांच हजार प्रदर्शनकारी बिछीवाड़ा से मोतली मोड़ के बीच करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र में डटे रहे। दूसरे दिन शुक्रवार को भी प्रदर्शनकारियों ने हंगामा किया।

इस दौरान उन्होंने मोतली मोड़ स्थित होटल में तोड़फोड़ की। पार्किंग में खड़े वाहनों को आग लगा दी। डूंगरपुर के पुलिस अधीक्षक जय यादव की कार जला दी। हिंसक प्रदर्शन पर उतरे प्रदर्शनकारी दिनभर पुलिस को छकाते रहे। हवाई फायर कर खदेड़ने का प्रयास कर रही पुलिस पर प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। ऐसे में उदयपुर और बांसवाड़ा से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।

निषेधाज्ञा लागू, इंटरनेट सेवा बंद

बताया जाता है कि प्रदर्शन में गुजरात के आदिवासी भी शामिल हुए हैं। उधर, राजस्थान सरकार को चुनौती देता वीडियो वायरल हुआ है। ऐसे में प्रदर्शन से प्रभावित इलाकों में प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर इंटरनेट सेवा बंद कर दी है।

बाजार कराए बंद

हालात को देखते हुए उदयपुर की पुलिस महानिरीक्षक विनीता ठाकुर ने कमान संभाल ली है। वह मोतली रोड पर डटीं हुई हैं। उदयपुर जिले के ऋषभदेव तथा परसाद कस्बे में पुलिस तैनात की गई है। बाजार बंद करा दिए गए हैं।

पुलिस को पीछे हटना पड़ा

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के चलते प्रदर्शनकारियों का पुलिस मुकाबला नहीं कर पा रही है। जंगल और पहाडि़यों के कारण वह असमर्थ नजर आ रही है। ऐसे में पुलिस को जहां पीछे हटना पड़ा, वहीं जंगल तथा पहाडि़यों के बीच से प्रदर्शनकारी उस पर पथराव कर रहे हैं।

एक-दूसरे पर आक्रामक राजनेता 

प्रदर्शन को लेकर राजनेता एक-दूसरे पर आक्रामक हैं। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया तथा अन्य भाजपा नेताओं ने इस मामले में कांग्रेस सरकार को फेल करार दिया है। इसके जवाब में कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य एवं पूर्व सांसद रघुवीर मीणा ने हिंसक प्रदर्शन के लिए भाजपा तथा भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। बीटीपी विधायक राजकुमार रोत ने इसके लिए अशोक गहलोत सरकार तथा पुलिस को दोषी ठहराया।

शिक्षा मंत्री बोले-हम मांग सुनने को तैयार

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने ट्वीट कर शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के बहकावे में आकर की गई आगजनी और तोड़फोड़ की घटना निंदनीय है। मेरा आग्रह है कि प्रदर्शनकारी बातचीत के लिए आगे आएं। हम कानून सम्मत हर मांग सुनने को तैयार हैं।

चौबीस घंटे से ज्यादा समय से हाईवे जाम

आदिवासी आंदोलनकारियों के चलते उदयपुर-अहमदाबाद हाईवे चौबीस घंटे से अधिक समय से बाधित है। खेरवाड़ा में आदिवासियों के आगजनी तथा लूटपाट की घटनाओं के बाद वाहनों को खेरवाड़ा होकर गुजरात भेजने का प्रयास विफल हो गया है। इसके चलते उदयपुर से गुजरात जाने वाले वाहन राजमार्ग पर फंसे हुए हैं।

यह है आंदोलनकारियों की मांग

आंदोलनकारियों की मांग है कि जनजाति क्षेत्र में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के रिक्त सामान्य वर्ग के 1167 पदों पर जनजाति अभ्यर्थियों से भरने की है। यह मुद्दा हाईकोर्ट में भी उठाया गया और हाईकोर्ट ने उनकी याचिका रद कर दी थी।

जनजाति अभ्यर्थी दूर, उत्पाती आदिवासियों आंदोलन में उतरे, हिंसा, लूटपाट, आजगनी 

बताया जा रहा है कि कांकरी डूंगरी पर धरने पर बैठे जनजाति अभ्यर्थी इस आंदोलन से दूर हो गए है, जबकि इस पर उत्पाती आदिवासी हिंसा, आगजनी तथा लूटपाट जैसी घटनाएं कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती परीक्षा में सामान्य वर्ग के रिक्त पदों पर जनजाति अभ्यर्थियों की भर्ती की मांग को लेकर धरना देने वाले एक अभ्यर्थी का कहना है कि यदि वह हिंसा पर उतारू हो जाएंगे तो नौकरी से भी वंचित हो जाएंगे। आंदोलन में अभ्यर्थी नहीं, बल्कि उत्पाती आदिवासी शामिल हैं।

सीएम अशोक गहलोत बोले, यह बेहद बेहद दुर्भाग्यपूर्ण

डूंगरपुर जिले में उपद्रव तथा हिंसक प्रदर्शन की घटना को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए लिखा कि यह सब बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विरोध करने के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल हो, शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो लेकिन कानून को अपने हाथ में लेने का किसी को अधिकार नहीं है। प्रदर्शनकारियों से अपील है, कृपया शांति व कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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