जागरण संवाददाता, जयपुर। Rajasthan Assembly. राजस्थान विधानसभा में सोमवार को नागौर जिले में दो दलित युवकों को बेरहमी से पीटने और गुप्तांग में पेट्रोल डालने का मामला विधानसभा में उठा। भाजपा विधायकों ने इस मामले को लेकर सदन से वाकआउट किया। वहीं, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) विधायकों ने सदन में धरने पर बैठने की चेतावनी दी। भाजपा और रालोपा विधायक नागौर के जिला पुलिस अधीक्षक सहित अन्य जिम्मेदार पुलिस अफसरों को हटाने की मांग कर रहे थे। शून्यकाल में रालोपा विधायक नरायण बेनिवाल और पुखराज गर्ग ने विधानसभा में यह मामला उठाया।

उन्होंने इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाने और पीड़ितों को राहत पैकेज देने की मांग की है। नारायण बेनीवाल ने कहा कि दोनों दलित युवकों के साथ दबंगों ने 16 फरवरी को मारपीट कर गुप्तांग में पेट्रोल डाला। वे पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने गए तो उन्हें टाल दिया गया। इसके तीन दिन बाद 19 फरवरी को पुलिस अधिकारियों ने दोनों भाइयों को पांथोड़ी पुलिस थाने में बुलाकर आरोपितों से समझौता कराने का दबाव बनाया। दोनों भाई समझौते के लिए तैयार नहीं हुए तो फिर आरोपितों के खिलाफ सामान्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। मामला सार्वजनिक हुआ तो पुलिस हरकत में आई। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस इस मामले में गंभीरता अपनाती तो पीड़ितों को पहले ही न्याय मिल जाता। भाजपा विधायकों ने बजट पर बहस के दौरान आरोप लगाया कि पुलिस अधीक्षक इस मामले को दबाने में जुटे रहे।

उल्लेखनीय है कि घीसाराम और पन्नालाल दो चचेरे भाई अपनी बाइक की सर्विस कराने गए थे। वहां सर्विस सेंटर में चोरी का आरोप लगाते हुए भींव सिंह एवं उसके साथियों ने दोनों के साथ मारपीट की और फिर लोहे के पेंचकस पर पेट्रोल से भरा कपड़ा लपेट गुप्तांग में डाला।

सत्तारूढ़ दल के विधायक ने ही लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

राज्य विधानसभा में सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक भरत सिंह ने प्रदेश में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव से लेकर उपखंड स्तर पर तैनात एसडीएम तक भ्रष्टाचार कर रहे हैं। शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए भरत सिंह ने कहा कि प्रदेश में अधिकांश सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार फैला हुआ है। भ्रष्ट अफसर जेल से निकलने के बाद नौकरी और प्रमोशन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामले में राजस्थान का देश में दूसरा नंबर है। ऐसे हालात सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़े करते हैँ।

फसल खराबे पर मंत्री का अजीब जवाब

राज्य विधानसभा में आपदा प्रबंधन एवं सहायता मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को सहायता से जुड़े सवाल का अजीब जवाब दिया। उन्होंने सदन में कहा कि यदि फसल 33 प्रतिशत से कम खराब हुई है तो मैं क्या करूं। नियमों के अनुसार 33 फीसदी से अधिक खराबे पर ही सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है।

उन्होंने बताया कि दिसंबर, 2019 में सात जिलों में किसानों की फसल खराब होने की जानकारी मिली थी, जिस पर विशेष गिरदावरी कराई गई। उन्होंने कहा कि इन जिलों के 139 गांवों में गिरदावरी कराई गई,जिन किसानों के खेत में 33 प्रतिशत से कम खराबा हुआ उन्हे सहायता नहीं दी जाएगी। शेष को शीघ्र ही मदद स्वीकृत कर दी जाएगी। मंत्री के इस जवाब पर भाजपा विधायकों ने नाराजगी जताई।

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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