सुभाष शर्मा, उदयपुर। कांग्रेस नगर निगम उदयपुर पर कब्जा करने में विफल रही, लेकिन उसके लिए संतोष की बात यह रही कि यहां पहली बार कांग्रेस पार्षदों की संख्या बीस पहुंच गई। अब नेता प्रतिपक्ष पिछले पांच बोर्ड के मुकाबले ज्यादा ताकतवर होगा। पिछली बार कांग्रेस नगर निगम बोर्ड में नेता प्रतिपक्ष के लिए आवश्यक पार्षद भी नहीं जिता पाई और 55 वार्ड के निगम में कांग्रेस के महज तीन ही पार्षद थे। इस बार नेता प्रतिपक्ष कौन बनेगा, इसका फैसला यूं तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) करेगी, लेकिन यह साबित करेगा कि इस निर्णय में पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की चलेगी या कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य रघुवीरसिंह मीणा की।

उदयपुर शहर कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष के लिए तीन पार्षदों के नाम पीसीसी को भेजे हैं, जिनमें से दो डॉ. गिरिजा गुट के जबकि एक पार्षद मीणा गुट का है। उदयपुर शहर कांग्रेस कमेटी ने नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष के लिए महापौर के लिए चुनाव लड़ने वाले अरुण टांक के अलावा वार्ड 29 के पार्षद लोकेश गौड़ और वार्ड 62 की पार्षद हितांशी शर्मा का नाम पीसीसी को भेजे हैं।

इनमें हितांशी पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास की भतीजा बहू है। इसके अलावा पार्षद अरुण टांक भी डॉ. गिरिजा गुट के माने जाते हैं। लोकेश गौड़ कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व सांसद रघुवीरसिंह मीणा गुट से हैं। पीसीसी नेता प्रतिपक्ष के लिए महिला का चयन करती है तो हितांशी शर्मा का नाम तय है, जो उदयपुर के इतिहास में पहली बार होगा। अभी तक पांच बोर्ड में पुरुष पार्षदों को ही नेता प्रतिपक्ष का मौका मिला है।

यदि पीसीसी अनुभव को वरीयता देती है तो लोकेश गौड़ इकलौते पार्षद हैं जो कांग्रेस से लगातार दोबारा चुनाव जीतकर आए हैं, जबकि अरुण टांक ने महापौर के वार्ड से चुनाव लड़ बड़ी जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी मजबूत की है। प्रभारी मंत्री भंवरलाल मेघवाल ने भी नेता प्रतिपक्ष को लेकर कांग्रेस शहर जिला पदाधिकारियों से चर्चा की। हालांकि बाद में उन्होंने यही कहा कि नेता प्रतिपक्ष का अंतिम निर्णय तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी ही करेगी।

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Posted By: Sachin Mishra

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