जागरण संवाददाता,  जयपुर! राजस्थान के स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर एक बार फिर राजनीति शुरू हो गई है । राजस्थान माध्यमिक शिक्ष बोर्ड की 10वीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए महाराणा प्रताप को कमजोर बताया गया है । इसमें कहा गया है कि 16वीं सदी के मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप में शत्रुतापूर्ण परिस्थितियों में एक सेना नायक के रूप में धैर्य व योजना की कमी थी ।

इसके दूसरे पाठ "संघर्षकालीन भारत " में लिखा गया है कि सेना नायक में प्रतिकूल परिस्थितियों में जिस धैर्य और योजना की आवश्यकता होनी चाहिए, महाराणा प्रताप में उसकी कमी थी । पाठ में लिखा गया है कि महाराणा प्रताप व अकबर के बीच होने वाला युद्ध धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक था । बोर्ड के ई-पाठ्क्रम में भी इसका उल्लेख किया गया है । यह पाठ हल्दीघाटी के युद्ध के बारे में है । 

इसमें लिखा गया है कि अकबर की सेना पहाड़ी इलाकों में लड़ने में निपुण नहीं थी, वहीं महाराणा प्रताप की सेना मैदान में लड़ने में सक्षम नहीं थी । उधर इस किताब के लेखक चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि मैने किताब में इस तरह की बातों का उल्लेख नहीं किया है । मुझे जानकारी नहीं है कि ये तथ्य कैसे जोड़े गए।

भाजपा नेताओं ने जताई नाराजगी

पाठ में जोड़े गए इन तथ्यों को लेकर महाराणा प्रताप के वंशज, जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य एवं भाजपा सांसद दीया कुमारी व राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह महान योद्धा का सार्वजनिक अपमान है । कटारिया ने कहा कि यह गिरी हुई मानसिकता वाली बात है । इससे प्रदेश में अशांति होगी, विरोध होगा । दीया कुमारी ने कहा कि आदर्श पुरूष के व्यक्तित्व के साथ छेड़छाड़ करना ठीक नहीं है । इतिहास से छेड़छाड़ करने का काम हमेशा कांग्रेस शासन में होता है ।

महाराणा प्रताप के वंशज और उदयपुर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को बच्चों को सही तथ्य पढ़ाने चाहिए । उल्लेखनीय है कि पिछली कांग्रेस सरकार में अकबर को एक पुस्तक में महान बताया गया था । बाद में पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार ने बदलाव करते हुए महाराणा प्रताप को महान बताते हुए यह कहा गया था कि हल्दीघाटी का युद्ध प्रताप ने ही जीता था ।

Posted By: Vijay Kumar

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