जयपुर, जागरण संवाददाता। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर बुधवार को राजस्थान सरकार में शांति व अहिंसा विभाग अस्तित्व में आ गया। यह विभाग प्रदेश में गांधी के संदेश को प्रदेश के निचले स्तर तक पहुंचाने और आपसी भाईचारे को बढ़ाने के लिए काम करेगा। कला व संस्कृति विभाग इसका मूल विभाग होगा। इसके साथ ही गुजरात के साबरमती आश्रम की तर्ज पर प्रदेश में गांधी संग्रहालय और आश्रम स्थापित करने को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहल की है। गांधी संग्राहलय व आश्रम बनाने को लेकर अधिकारियों की टीम गठित की गई है। स्वायत्त शासन और कला व संस्कृति विभाग इस संग्राहलय बनाने के काम को देखेगा।

गांधी जयंती पर बुधवार को सरकारी विभागों में प्लास्टिक की पानी की बोतल सहित अन्य सामानों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। सरकारी बैठकों में अब प्लास्टिक के स्थान पर कांच की बोतल में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि महात्मा गांधी सत्य, अहिंसा व शाति के पुजारी थे, हम उनकी याद में विशेष सेल बनाने के साथ ही नौजवानों को गांधी के बताए रास्ते पर चलने को लेकर तैयार करेंगे।

गहलोत सरकार शांति व अहिंसा विभाग के माध्यम से नौजवानों में सत्य व अहिंसा का संदेश देने के साथ ही आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए का काम करेगी। विभाग द्वारा प्रदेश में समय-समय पर गांधी के जीवन दर्शन को लेकर चित्र प्रदर्शनी लगाने के साथ ही उनसे जुड़े साहित्यों का प्रकाशन व युवाओं को गांधी के जीवन से जुड़े घटनाक्रम को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्कूली बच्चों को गांधी जी के जीवन से रूबरू कराने के लिए अन्य प्रदेशों में भी ले जाया जाएगा। यह विभाग सामाजिक न्याय विभाग के साथ मिलकर दलितों के उत्थान के लिए भी काम करेगा।

सरकार विभाग में प्लास्टिक की जगह कांच की बोतल का उपयोग होगा

उधर सरकार ने अब तय किया है कि निचले स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की बैठक में पानी के लिए प्लास्टिक की बोतल का उपयोग नहीं होगा। बैठक में कांच की बोतल में पानी उपलब्ध कराया जाएगा। आम लोगों के बीच भी कांच अथवा स्टील की बोतल का उपयोग अधिक से अधिक हो, इसकी जिम्मेदारी स्थानीय निकाय विभाग को सौंपी गई है।

स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में में पहला कदम सरकार से शुरू होगा और फिर आम आदमी पर लागू होगा। पहले लोगों को प्लास्टिक से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में समझाया जाएगा और फिर दूसरे चरण में सख्ती होगी।

उल्लेखनीय है कि गहलोत ने जून में शांति व अंहिसा विभाग बनाने को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए थे। इस पर अब अमल हुआ है। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता में रहते हुए हैप्पीनेस विभाग बनाया था। 

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Posted By: Sachin Mishra

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