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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 01, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हर महीने इतिहास रच रहा सांवलिया मंदिर का चढ़ावा, जुलाई महीने में मिला एक किलो से ज्यादा सोना और 204 किलो चांदी

Published: Fri, 01 Aug 2025 10:36 PM (IST)

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कृष्णधाम सांवलिया सेठ मंदिर में जुलाई महीने के दौरान चढ़ावे में मिले सोना चांदी और ...और पढ़ें

सांवलिया मंदिर को चढ़ावे में मिला एक किलो से ज्यादा सोना और 204 किलो चांदी (फाइल फोटो)
सांवलिया मंदिर को चढ़ावे में मिला एक किलो से ज्यादा सोना और 204 किलो चांदी (फाइल फोटो)

HighLights

  1. राजस्थान के मंदिर को एक माह में 28 करोड़ से अधिक की राशि भेंट में मिली
  2. भगवान सांवलिया सेठ को अपने व्यापार में सहयोगी बनाने की है मान्यता

 जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कृष्णधाम सांवलिया सेठ मंदिर में जुलाई महीने के दौरान चढ़ावे में मिले सोना, चांदी और धन का रिकॉर्ड बना है। जुलाई में मंदिर के दान पात्र में एक किलो 433 ग्राम सोना, 204 किलो 500 ग्राम चांदी चढ़ावे के रूप में मिली है।

इतना मिला दान

मंदिर में श्रद्धालुओं ने 28 करोड़ 32 लाख 45 हजार 555 रुपए दान के रूप में दिए हैं। इनमें 22 करोड़ 22 लाख 76 हजार 77 रुपए नकद और छह करोड़ नौ लाख 69 हजार 478 रुपए ऑनलाइन माध्यम से मिले हैं।

 चांदी प्राप्त होने का रिकॉर्ड बना

मंदिर मंडल के सदस्य पवन तिवाड़ी ने बताया कि मंदिर में भेंट में मिली रकम की छह राउंड में गिनती हुई है। साल 2024 में दीपावली के बाद 30 नवंबर को दो महीने का भंडार खोला गया था, उस समय 187 किलो नौ ग्राम चांदी प्राप्त हुई थी। हालांकि, इस बार एक महीने में ही चांदी प्राप्त होने का रिकॉर्ड बना है।

मंदिर में लगे दान पात्रों, ऑनलाइन मिलने वाली भेंट राशि और जेवरात की गणना हर माह की जाती है। मंदिर मंडल के प्रमुख के रूप में राज्य सरकार ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी को नियुक्त किया हुआ है।

पिछले दिनों मंदिर के दान पात्र में चांदी की हथकड़ी मिली

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों मंदिर के दान पात्र में चांदी की हथकड़ी, छोटा पेट्रोल पंप और छोटी पिस्तौल व गोलियों सहित कई सामान मिले थे। मान्यता है कि मंदिर में भगवान सांवलिया सेठ को श्रद्धालु अपने व्यापार में सहयोगी बनाते हैं और मन में लिए संकल्प के आधार पर गुप्त रूप से नकद राशि अथवा सोने व चांदी के जेवरात चढ़ाकर जाते हैं।