जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के छह विधायको के पार्टी में शामिल होने के बाद कांग्रेस का आंतरिक घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमा जहां इन विधायकों को सत्ता में भागीदारी देना चाहता है, वहीं  उप मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट समर्थक इसका विरोध कर रहे है ।

पायलट खुद और उनके समर्थकों का कहना है कि जिन लोगों ने पांच साल विपक्ष में रहते हुए अपना खुन-पसीना बहाया उन्हें सत्ता में भागीदारी मिलनी चाहिए। पायलट बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले छह विधायकों को मंत्री बनाए जाने के विरोध में है।

उधर बसपा विधायकों ने कांग्रेस में शामिल होने का पत्र विधानसभा अध्यक्ष को तो सौंप दिया। लेकिन अभी तक कांग्रेस की सदस्यता अब तक ग्रहण नहीं की है। इसी बीच बसपा विधायकों ने शुक्रवार को अनौपचारिक बैठक कर कहा कि सीएम अशोक गहलोत के कहने पर वे कांग्रेस में शामिल हुए है। वे कांग्रेस में रहते हुए गहलोत को अपना नेता मानेंगे। इन विधायकों ने गहलोत राजस्थान के आम लोगों की पसंद है,इसलिए वे हमारे भी नेता है।

पूर्व मंत्री और बसपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक राजेंद्र गुढ़ा एवं दीपचंद खेरिया ने कहा कि गहलोत ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात करके ही बसपा विधायक दल का कांग्रेस में विलय कराया है। दोनों विधायकों ने कहा कि गहलोत का उनके साथ पिछले छह माह से संपर्क बना हुआ था और वे उनके कहने एवं चेहरे पर ही कांग्रेस में शामिल हुए है। पायलट का नाम लिए बिना गुढ़ा ने कहा कि वे कांग्रेस में रहते हुए गहलोत को ही अपना नेता मानेंगे किसी अन्य को नेता के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

मंत्री बनाने का अधिकार सीएम को

पायलट का नाम लिए बिना कटाक्ष करते हुए कहा कि नैतिकता तो लोकसभा चुनाव में हारने के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर राहुल गांधी ने निभाई है,लेकिन राजस्थान में ऐसा नहीं किया गया। उल्लेखनीय है कि पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष है और गुढ़ा का इशारा उनकी तरफ था। पायलट द्वारा बसपा विधायकों को मंत्री बनाए जाने का विरोध करने पर मीडिया से बातचीत में गुढ़ा ने कहा कि मंत्री बनाने का अधिकार मुख्यमंत्री का होता है किसी और नेता के पास यह अधिकार नहीं है। गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से चर्चा करके ही निर्णय लिया होगा । 

Posted By: Preeti jha

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