जयपुर, जेएनएन। राजस्थान में मौजूदा सरकार ने अपनी कमाई बढ़ाने के लिए पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा दिया, लेकिन इसका उलटा असर हुआ। इस समय पूरे उत्तर भारत में राजस्थान में पेट्रोल और डीजल की कीमत सबसे ज्यादा है। इससे राज्य के सीमावर्ती जिलों में पेट्रोल पंपों की बिक्री कम हो गई और सरकार को भी फायदे की जगह नुकसान हो गया। सरकार से तीन महीने से वैट में कमी करने की मांग कर रहे राजस्थान पेट्रोल पंप संचालक अब दिवाली जैसे बड़े त्योहार से पहले बुधवार को 24 घंटे पेट्रोल पंप बंद कर रहे हैं।

राजस्थान मे पेट्रोल व डीजल की बिक्री से मिलने वाला वैट सरकार की कमाई का बड़ा जरिया है। राज्य की पिछली सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले डीजल पर वैट की दर चार प्रतिशत कम कर दी थी और यह 18 प्रतिशत रह गया था। वहीं, पेट्रोल पर वैट 30 से घट कर 26 प्रतिशत रह गया था। मौजूदा सरकार ने लोकसभा चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद जुलाई में पेट्रोल और डीजल पर वैट की दर में फिर से चार प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी और अब यह बढ़ कर डीजल पर 22 और पेट्रोल पर 30 प्रतिशत हो गया है। सरकार ने यह कदम अपना कर राजस्व बढ़ाने के लिए उठाया था, क्योंकि किसान कर्ज माफी और बेरोजगाी भत्ते जैसे चुनावी वादे पूरे करने के लिए सरकार के लिए पैसे की जरूरत थी, लेकिन सरकार के इस निर्णय का उल्टा असर हुआ।

राजस्थान में पेट्रोल और डीजल पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात के मुकाबले पहले ही कुछ महंगा था। वैट की दरें बढ़ने के बाद यह अंतर पांच से आठ रुपये प्रति लीटर तक हो गया। स्थिति यह है कि राजस्थान में जहां पेट्रोल औसतन 77 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 72 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, वहीं पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल औसतन 73 रुपये तथा डीजल 65 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। राजस्थान में ही अलग-अलग जिलों में पेट्रोल डीजल की दर अलग अलग है।

राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित बगई के मुताबिक, इस अंतर के कारण अब राजस्थान में आने वाले या यहां से जाने वाले वाहन पड़ोसी राज्यों से पेट्रोल और डीजल भरवाते हैं। पड़ोसी राज्यों के एक पेट्रोल पंप की बिक्री राजस्थान के बीस पंपों के बराबर हो गई है। राजस्थन के पड़ोसी राज्यों की सीमा से लगते जिलों में पेट्रोल पंपों के बंद होने की स्थिति आ गई है। जुलाई के बाद से डीजल की बिक्री में डेढ़ से दो लाख लीटर तक की कमी आ गई है। इससे सिर्फ पेट्रोल पंप संचालकों को ही नुकसान नहीं हो रहा है, बल्कि सरकार को भी कमाई के बजाए घाटा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि कीमत बढ़ने के बाद डीजल पर सरकार को अगस्त और सितंबर में सौ करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। बगई ने कहा कि हम शुरू से ही यह दरेें कम करने की मांग कर रहे हैं। सरकार को भी सारी स्थिति बताई जा चुकी है, लेकिन अधिकारी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। इसी के चलते अब हमने 23 अक्टूबर 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है। यह सांकेतिक बंद है। इस दौरान सिर्फ एंबुलेंस और दमकलों को पेट्रोल डीजल दिया जाएगा। सरकार सुनवाई नहीं करती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।

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Posted By: Sachin Mishra

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