जयपुर, मनीष गोधा । राजस्थान में कभी बूम पर रही इंजीनियरिंग शिक्षा अभी सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। इस बार राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में उपलब्ध 39 हजार से ज्यादा सीटों में से सिर्फ 14 हजार पर ही प्रवेश हो पाए हैं और करीब 25 हजार सीटें खाली प़़डी हैं। सरकारी कॉलेजों में भी आधी सीटें ही भर पाई हैं।

राजस्थान में वर्ष 2000 से 2008 तक ब़़डी संख्या में इंजीनियरिंग कॉलेज खुले और सीटों की संख्या 65 हजार तक जा पहुंची थी, लेकिन 2012 से प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों का बुरा दौर शुरू हो गया। इसका प्रमुख कारण इंजीनियरिंग शिक्षा के क्षेत्र में आई मंदी रहा। दूसरी वजह प्रदेश में ब़़डी संख्या में निजी विश्वविद्यालयों का खुलना रहा। इसके चलते पिछले छह साल में करीब 40 कॉलेज बंद हो गए।

इस बार सरकारी और निजी के 107 कॉलेजों में सीटों की संख्या गिरकर 39 हजार 127 रह गई। प्रवेश की स्थिति यह है कि करीब 25 कॉलेज अपने यहां शून्य सत्र घोषिषत करने की स्थिति में आ गए हैं। इस वर्ष कई बार की काउंसलिंग के बाद भी 12 हजार सीटें ही भर पाई थीं। बाद में सरकार ने सीधे प्रवेश की अनुमति दी और मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर प्रवेश हुए तब जाकर करीब 14 हजार प्रवेश हो पाए।

सरकारी कॉलेजों की स्थिति भी दयनीय राजस्थान में छात्रों के बीच निजी से ज्यादा सरकारी इजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश की हो़ड रही है। सरकारी कॉलेजों में प्रवेश मुश्किल से मिलता रहा है, लेकिन इस बार 13 सरकारी कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं। इन कॉलेजों में 5996 सीटें हैं, लेकिन काउंसलिंग से सिर्फ 2569 सीटें ही भर पाई। बाद में इन कॉलेजों को भी सीधे प्रवेश की अनुमति दी गई, तब 538 और सीटों पर प्रवेश हुए। इनमें भी दो कॉलेजों में पांच से सात सीटें ही भर पाई, जिन्हें सरकार बंद करने की तैयारी कर रही है।

निजी 15 कॉलेजों में तो दस से कम प्रवेश हुए हैं। वहीं, 25 कॉलेज इस बार शून्य सत्र घोषिषत कराने के लिए आवेदन कर रहे हैं। स्थिति को देखते हुए करीब 15 कॉलेजों ने स्कूल शिक्षा विभाग में आवेदन कर परिसर में स्कूल चलाने की अनुमति मांगी है, ताकि कॉलेज बनाने और उसे चलाने में हुए खर्च की भरपाई की जा सके। ज्यादा संख्या में निजी विवि को मंजूरी मिली राजस्थान इंजीनियरिंग कॉलेज एसोसिएशन के सचिव श्रीधर सिंह बताते हैं कि आज भी ब़़डी संख्या में छात्र इंजीनियरिंग में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन ज्यादातर निजी विश्वविद्यालयों में जा रहे हैं। निजी विश्वविद्यालयों को ब़़डी संख्या में मंजूरी देकर सरकार ने ही इंजीनियरिंग कॉलेजों को नुकसान पहुंचाया है।

इन निजी विश्वविद्यालयों पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषषद का नियंत्रण नहीं है और ये मनमाने तरीके से प्रवेश दे देते हैं। इससे छात्र उधर चले जाते हैं। हम इस प्रयास में हैं कि निजी विश्वविद्यालयों में भी प्रवेश को लेकर सरकार कोई नीति बनाए। इस मामले में हम कोर्ट में जाने पर भी विचार कर रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि कई कॉलेज अब स्कूल खोलने के लिए आवेदन कर रहे हैं।

Posted By: Preeti jha