जयपुर, जागरण संवाददाता। 72 दिन के लॉकडाउन का सन्नाटा अब टूट गया है। केंद्र के बाद राज्य सरकार ने सोमवार से काफी हद तक छूट दी तो राजस्थान की हजारों खदानों में काम शुरू हो गया। प्रदेश में करीब 30 हजार खदानें है। इनमें से 14 हजार 686 अप्रधान खनिज व 182 प्रधान खनिजों की खदानें हैं। 12 हजार भवन निर्माण में काम आने वाले पत्थर की खदानें है। 11 खनिज ऐसे हैं, जिनमें प्रदेश का एकाधिकार है।

प्रदेश की जीडीपी में करीब 5 प्रतिशत का योगदान देने वाले खनिज उधोग में 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है। इसी कारण राजस्थान को खनिजों का अजायबघर भी कहा जाता है। वैसे तो राज्य सरकार ने करीब दो सप्ताह पूर्व ही खदानों में सोशल डिस्टेंसिंग से काम शुरू करने की अनुमति दी थी, लेकिन कोरोना के भय के चलते श्रमिक काम पर नहीं आ पा रहे थे। अब सोमवार से श्रमिक पहले की अपेक्षा अधिक तादाद में आने लगे हैं। श्रमिक आए तो खदानों में काम भी तेजी से शुरू हुआ। हालांकि कुछ दिनों बाद बारिश का दौर शुरू होने से खदानों में पानी भरने के काम एक बार फिर काम बंद हो जाएगा। माना जा रहा है कि अधिकतम एक माह तक काम हो सकेगा। ऐसा हर साल बारिश के मौसम में होता है।

मार्बल,सोप स्टोन व फेल्सपार होता है एक्सपोर्ट

प्रदेश का मार्बल पूरी दुनिया में विख्यात है। यहां से मार्बल देश ही नहीं बल्कि दुनिया में एक्सपोर्ट होता है। इसी तरह सैंडस्टोन के प्रदेश में तीन बड़े क्षेत्र हैं इनमें बिजौलिया,जोधपुर व बालेसर शामिल है। जोधपुर में करीब 14 हजार व बिजौलिया में करीब 1500 खदानें हैं। इन दोनों क्षेत्रों से राज्य सरकार को करीब 100 करोड़ सालाना राजस्व मिलता है।

वहीं प्रदेश में करीब 5 हजार फेल्सपार ग्राइंडिंग प्लांट है । ये प्लांट किशनगढ़, नसीराबाद, ब्यावर, गंगापुर, राजसमंद, आमेट, नीमकाथाना, पावटा, सीक, उदयपुर व पाली में है। इस फेल्सपार को गुजरात के मोरवी भेजा जाता है, जहां इससे टाइल बनती है। इसी तरह भीलवाड़ा जिले में करीब 1500 सैंडस्टोन के पट्टे हैं। यहां लेड, जिंक, सिल्वर, मेसनरी स्टोन, आयरन, ग्रेनाइट, सोपस्टोन की भी खदानें है। भीलवाड़ा राजस्थान में कोराना का सबसे पहले हॉटस्पॉट बना। यहां की खदानों को कोरोना महामारी के कारण सबसे अधिक नुकसान हुआ है। राज्य के खानमंत्री प्रमोद जैन भाया का कहना है कि देश का सबसे अधिक मार्बल, सैंडस्टोन, सोप स्टोन राजस्थान में निकलता है। यहां करीब 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं करीब 15 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है । 

Posted By: Preeti jha

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