जयपुर, [जागरण ब्यूरो] । राजस्थान में इस बार मानसून ने किसानों और प्रदेशवासियों को निराश किया। एक तरफ जहां तीन जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी, वहीं 15 जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। प्रदेश के 25 जिलों की 154 तहसीलों में सूखे जैसे हालात हैं।

बांधों में पानी की आवक भी कम हुई है। कुल बांधों में से 301 बिलकुल खाली हैं, जबकि 254 आंशिक भरे हुए हैं। प्रदेश में इस वर्ष मौसम विभाग ने 98 प्रतिशत के आसपास बारिश का दावा किया था। अब मानसून की विदाई के साथ मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में सामान्य से 2.37 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

दिखाए अजीब रंग : राजस्थान में इस बार बारिश ने अजीब रंग दिखाए हैं। आम तौर पर सूखे से प्रभावित रहने वाले जोधपुर संभाग में इस बार असामान्य बारिश हुई है। संभाग के बाड़मेर, जालौर और सिरोही में बाढ़ के रहे। वहीं बीकानेर, अजमेर और उदयपुर संभाग में भी सामान्य बारिश हुई है। वहीं बारिश से तर रहने वाले कोटा, जयपुर और भरतपुर संभागों में इस बार सामान्य से 28 से 48 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। राजस्थान में सबसे कम 326 मिमी बारिश धौलपुर और सबसे ज्यादा 1382 मिमी बारिश सिरोही में हुई।

बांध भी रहे रीते : कम बारिश के चलते गत वर्ष की तुलना में इस बार उदयपुर संभाग के बांधों को छोड़कर शेष संभागों के बांधों में पानी की आवक भी कम रही है। राजस्थान के में से सिर्फ बांध पूरे भर पाए। पिछले वर्ष जहां बांधों में 85 प्रतिशत पानी आया था, वहीं इस बार 68 प्रतिशत पानी ही आया है।

जयपुर, कोटा और उदयपुर संभाग के बांधों में पिछले वर्ष के मुकाबले औसतन आधा ही पानी आ पाया है। इसके चलते आधे से ज्यादा राजस्थान में पानी का संकट गहराने की आशंका है।

सरकार की बढ़ी मुश्किलें

मानसून के कारण इस बार सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। सरकार ने अभी केंद्र सरकार को बाढ़ प्रभावित जिलों में हुए नुकसान का मुआवजा देने के लिए ज्ञापन भेजा है। अब सूखे से प्रभावित जिलों के लिए चारे और पानी का इंतजाम करना पड़ेगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोटा संभाग में फसलों में कीड़ा लगा है और इसके चलते बड़े पैमाने पर फसल खराब हुई है। सरकार को प्रभावित किसानों को मुआवजा देना पड़ेगा।

Posted By: Preeti jha

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