उदयपुर, संवाद सूत्र। कोरोना महामारी के दौरान लोग अभी गंभीर नहीं हैं। आम लोग ही नहीं, दुकानदार भी लॉकडाउन में छूट की अवधि के बाद चोरी छिपे दुकानें खोल रहे हैं और शटर बंद कर सामान बेचने में लगे हैं। बांसवाड़ा में पुलिस ने आम आदमी और व्यापारियों को समझाने के लिए शुक्रवार को पहले गांधीगिरी अपनाई, लेकिन इसके बावजूद वह नहीं माने तो लाठियां भांजनी पड़ीं। कई दुकानदारों को उठा लिया तथा धारा 151 के तहत उन्हें पाबंद करने के बाद ही छोड़ा। बताया गया कि शुक्रवार को बांसवाड़ा जिले की क्विक रेसपोंस टीम ने पहले बाजारों में जाकर मुनादी कराई कि कोई भी आम आदमी तथा व्यापारी लॉकडाउन में मिली छूट अवधि के बाद बाजार में ना रुके और दुकानें नहीं खोले।

इसके लिए पुलिस ने पहले समझाइश का तरीका अपनाया तथा दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठान बंद कर घरों में सुरक्षित चले जाने को कहा। इसके बावजूद कई दुकानदार नहीं माने तब पुलिस ने ऐसा कड़ा रूख अपनाया कि उन्हें इसका अंदाजा नहीं था। जो दुकान तय अवधि के बाद भी दुकान खोले बैठे थे, उनके संचालकों तथा वहां मौजूद खरीदारों पर लाठियां भांजना शुरू कर दिया। इसके बाद दुकानदार मिन्नतें करते रहे लेकिन पुलिस ने लाठियां भांजना बंद नहीं किया, बल्कि दुकानदारों को उठाकर थाने पहुंचाना शुरू कर दिया। पुलिस की कड़ाई देखकर खरीदार भागने लगे। जिला पुलिस अधीक्षक कविन्द्र सिंह सागर ने बताया कि सुबह ग्यारह बजे पहले दुकानदारों तथा आम आदमियों को चेतावनी दे दी गई कि वह अपने घर लौट जाएं, लेकिन ऐसा नहीं करने के बाद पुलिस ने दो दर्जन से अधिक दुकानदारों को उठा लिया और सभी को कोतवाली थाने में लाया गया। जो भी आम आदमी सड़कों पर बेवजह घूम रहे थे, उन्हें शांति भंग के तहत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें चौदह दिन के लिए क्वारंटाइन सेंटर भेजने के साथ पाबंद करने के आदेश दिए। पकड़े गए दुकानदारों की जमानत उनको पाबंद किए जाने के लिए मंजूर की गई।