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'दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखना और मेहंदी लगाना मानसिक क्रूरता', जयपुर कोर्ट की अहम टिप्पणी

Published: Tue, 27 Oct 2026 11:51 PM (IST)

जयपुर पारिवारिक न्यायालय ने दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखने और उसके नाम की मेहंदी लगाने को ...और पढ़ें

जयपुर कोर्ट की अहम टिप्पणी (सांकेतिक तस्वीर)

जयपुर कोर्ट की अहम टिप्पणी (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ रखना व्यभिचार माना।

  2. पत्नी का यह आचरण मानसिक क्रूरता के समान।

  3. जयपुर कोर्ट ने 13 साल का विवाह समाप्त किया।

जागरण संवाददाता, जयपुर। जयपुर के पारिवारिक न्यायालय ने विवाहित होते हुए दूसरे पुरुष के लिए करवा चौथ का व्रत रखने और उसके नाम की मेहंदी लगाने जैसे आचरण को व्यभिचार माना है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि पत्नी का यह व्यवहार सामान्य दोस्ती की सीमा से कहीं आगे है। पति को लंबे समय तक दांपत्य सहचर्य से वंचित रखना भी मानसिक क्रूरता है।

कोर्ट ने पति की विवाह विच्छेद की याचिका को मंजूर करते हुए 13 वर्ष पुराने विवाह को समाप्त करने के निर्देश दिए हैं। दोनों का विवाह मई 2013 में हुआ था। बता दें कि पति ने जनवरी 2023 को विवाह विच्छेद के लिए याचिका दायर की थी।

जज विशाल भार्गव ने आदेश में कहा कि पत्नी ने स्वीकार किया है कि उसने दूसरे पुरुष के साथ गोवा में फेरे लिए और उसके साथ वैवाहिक संबंध जैसा आचरण किया। उसके लिए करवा चौथ का व्रत रखा और हाथ पर उसके नाम की मेहंदी भी लगाई।

कोर्ट ने माना कि पत्नी ने पति के प्रति वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। दांपत्य सहचर्य से वंचित रखा, नाबालिग बेटे की उचित देखभाल नहीं की और पति के माता-पिता के साथ भी अनुचित व अपमानजनक व्यवहार किया।

इन घटनाओं की पूरी श्रृंखला से पति के लिए वैवाहिक जीवन में मानसिक शांति, भरोसा और संबंध बनाए रखना कठिन हो गया। कोर्ट ने इसे मानसिक क्रूरता माना। पति ने कोर्ट में बताया था कि पत्नी ने साल 2019 से उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया।

दोनों के बीच पिछले चार सालों में शारीरिक संबंध नहीं बने। हालांकि. कोर्ट ने इस तथ्य को पूरी तरह से नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सुबूत बताते हैं कि दोनों सवा साल से अलग रह रहे हैं। बच्चा 2018 में पैदा हुआ था। ऐसे में तलाक का केस दायर होने तक वह करीब 6 साल का था।