जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान के सहकारिता विभाग में फसली कर्ज का बड़ा घोटाला सामने आया है। प्रदेश में करीब छह लाख किसान बिना पात्रता के ही करीब दस साल से ब्याज मुक्त फसली कर्ज योजना का लाभ उठा रहे थे। इस साल ऑनलाइन फसली कर्ज वितरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में किसानों के साथ सहकारिता विभाग के कर्मचारियों के साथ ही स्थानीय प्रशासन के अफसर भी शामिल थे।

अब फसली कर्ज वितरण की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद करीब छह लाख किसान स्वत: ही अपात्र हो गए। इन अपात्र किसानों को फर्जी कर्ज देना बंद होने से सहकारी बैंकों का करीब तीन हजार करोड़ रुपया बचा है। सहकारी बैंकों में बचे तीन हजार करोड़ का लाभ उन पांच लाख नए किसानों को मिलेगा, जिन्हें पहले कभी सहकारी बैंकों से कर्ज नहीं मिल सका है। इन पांच लाख किसानों को रबी की फसल के लिए कर्ज दिया जाएगा।राज्य सरकार ने रबी की फसल के लिए छह हजार करोड़ रुपये का कर्ज वितरण करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि खरीफ की फसल के लिए तय किए गए 10 हजार करोड़ के कर्ज का ही सरकार वितरण नहीं कर सकती थी।

राज्य के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि राजस्थान देश में पहला राज्य है, जहां फसली कर्ज वितरण की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है। पहली बार लागू की गई इस योजना से अपात्र लोग स्वत:ही बाहर हो गए।

राज्य सहकारी बैंक के महाप्रबंधक इंदर सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों द्वारा भेदभाव अपना कर कर्ज वितरित किया जा रहा था। व्यवस्थापक वास्तविक किसानों के बजाय अपने परिजनों अथवा चहेते किसानों को फर्जी ढंग से कर्ज दे देते थे। लेकिन अब कर्ज वितरण की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के बाद फर्जीवाड़ा बंद हो गया। उन्होंने कहा कि जो छह लाख किसान स्वत: ही अपात्र हुए हैं, उनके नाम से जमीन ही नहीं है, जबकि वे कई साल से ब्याज मुक्त फसली कर्ज का फायदा उठा रहे थे। अब तक इस प्रक्रिया में जिम्मेदार रहे सहकारी समितियों के व्यवस्थापकों व अन्य कर्मचारियों की जांच कराई जाएगी। 

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Posted By: Sachin Mishra

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