जागरण संवाददाता,जयपुर। पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (पीएफआई) राजस्थान को आतंक का साफ्ट टारगेट मानकर काम कर रही थी। इसी योजना के तहत पिछले एक साल में हिंदू त्योंहारों पर दंगे भड़काए गए । सोची-समझी साजिश के तहत पथराव और आगजनी की गई। पीएफआई के जयपुर स्थित प्रदेश मुख्यालय पर नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की छापेमारी में कई आपत्तिजनक सामग्री मिली है। सामग्री में मुस्लिम युवाओं को कट्टरता से जोड़ने, राजस्थान में मुस्लिम धर्म के प्रचार और युवाओं को आतंक के रास्ते पर ले जाने एवं लिखित सामग्री के साथी आन लाइन सिलेबस पढ़ाए जाने के सबूत मिले हैं।

एनआईए की छापेमारी में मिली कई आपत्तिजनक सामग्री

पीएफआई को देश में दरपेश हिंदुत्व फासीवाद के खिलाफ एकमात्र मुखर संगठन बताने वाली सामग्री भी छापेमारी के दौरान मिली है। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान मिले कुछ कागजों में लिखा है कि पीएफआई आंदोलन करेगी, जिससे मथुरा और ज्ञानव्यापी में अयोध्या जैसा नहीं हो सके। इन कागजों में हिजाब का समर्थन करने की बात कही गई है।

पीएफआई के कार्यालय में आपत्तिजनक पोस्टर और बैनर भी मिले हैं। प्रदेश में संगठन की गतिविधियों को संचालित करने के लिए मिलने वाले पैसों के सबूत भी कंप्यूटर में मिले हैं। गुरुवार तड़के तीन बजे तक चली छापेमारी में पीएफआई के प्रदेश में दस साल से सक्रिय होने और इससे जुड़े राजनीतिक संगठन सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया की ओर से प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां संचालित किए जाने के दस्तावेज भी मिले हैं।

सूत्रों के अनुसार पीएफआई और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया केजयपुर, अलवर, भीलवाड़ा, कोटा, सीकर, चूरू, बारां, झालावाड़, भरतपुर और चित्तोडगढ़ जिलों में ज्यादा सक्रिय रहने की बात सामने आई है। युवाओ को जोड़ने का काम पीएफआई के छात्र संगठन कैंपस फ्रंट आफ इंडिया के द्वारा किया जाता है। इन दोनों संगठनों के माध्यम से प्रदेश में प्रभाव बढ़ाने की बात सामने आई है।

इन घटनाओं में पीएफआई का हाथ

पिछले एक साल में प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुए दंगों में पीएफआई का कनेक्शन पुलिस की जांच में साामने आ चुका है। 2 अप्रैल, 2022 को करौली में हिंदू नववर्ष केमौके पर दंगे भड़काने में पीएफआई और कांग्रेस के पार्षद मतलूब अहमद का हाथ होने की बात सामने आई थी। इस साल जोधपुर में अक्षय तृतीया के दिन दंगा भड़काने और भीलवाड़ा में चार से सात मई के बीच दो बाद दंगा भड़काने की कोशिश में पीएफआई की सक्रिय भूमिका मानी गई थी।

उदयपुर में टेलर कैन्हैयालाल की गर्दन काटकर की गई हत्या के आरोपितों रियाज एवं मोहम्मद गौस भी पीएफआई के कार्यक्रमों में शामिल होते थे। बारां से गिरफ्तार किए गए पीएफआई के प्रदेश सचिव सादिक सराफ और केरल में पकड़े गए प्रदेशाध्यक्ष आसिफ मिर्जा के खिलाफ राज्य पुलिस के पास पहले से ऐसे कई सबूत थे,जिनमें उन पर कट्टरता फैलाने के आरोप हैं। आसिफ की मां कोटा के सांगोद में कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। 

Edited By: Priti Jha