जोधपुर,  जागरण संवाददाता। नाबालिग से यौन दुराचार के मामले में जोधपुर के केंद्रीय कारागृह में जीवन पर्यंत जेल की सजा काट रहे आसाराम की जल्द सुनवाई की अर्जी हाईकोर्ट ने बहस सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है। आसाराम वर्ष 2013 से जेल में है। पिछले 7 सालों से अधिक समय से जेल में बंद होने के कारण आसाराम की ओर से शीघ्र सुनवाई की अर्जी लगाई गई थी जिस पर राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और रामेश्वर लाल व्यास की कोर्ट ने आसाराम की अर्जी को बहस सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

अपने ही गुरुकुल की नाबालिग छात्रा के साथ यौन दुराचार के मामले में आसाराम जोधपुर की सेंट्रल जेल में है। इसी मामले में जोधपुर की एससी एसटी की कोर्ट ने आसाराम को अंतिम सांस तक कारागार में रहने की सजा सुनाई है। इससे पहले सुनवाई के दौरान और कोर्ट जजमेंट के बाद से विगत 7 वर्षों से अधिक समय से आसाराम जोधपुर के जेल में है। आसाराम ने हाईकोर्ट व सेशन कोर्ट में भी पूर्व में कई बार जमानत याचिकाएं लगाई थी लेकिन उसे कहीं से भी राहत नहीं मिली ,जिसके बाद आसाराम ने अपनी आयु का हवाला देते हुए मामले में हाई कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की अपील की है। आसाराम के अधिवक्ता जगमाल चौधरी और प्रदीप चौधरी की ओर से यह अर्जी खंडपीठ में पेश की है। जिसे हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

संबंधित अपील में आसाराम की ओर से लंबे समय से जेल में रहने का उल्लेख किया है ,साथ ही अपनी 80 साल की आयु का जिक्र करते हुए मामले में जल्दी सुनवाई का अनुरोध किया है ।इससे पहले एक बार पूर्व में भी आसाराम के वकीलों द्वारा यह अर्जी लगाई गई थी जिसे सुनवाई पूर्व ही विड्रॉल कर लिया गया था ।इसके बाद नए सिरे से यह अर्जी लगाई गई है ,जिसे इस बार राजस्थान हाई कोर्ट ने की खंडपीठ ने सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है जिसको लेकर मामले में अगली सुनवाई जनवरी माह में मुकर्रर की गई है। 

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