जयपुर, मनीष गोधा, देश में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी भाजपा के लिए राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोपा) राजनीतिक मजबूरी बन कर उभरी है। स्थिति यह है कि पार्टी के अध्यक्ष और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कट्टर आलोचक हैं और गाहे-बगाहे उनके खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं। इसके बावजूद पार्टी ने पहले लोकसभा और अब दो सीटों के विधानसभा उपचुनाव में बेनीवाल से गठबंधन किया है।

किसी समय भाजपा के विधायक रहे हनुमान बेनीवाल पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कट्टर विरोधी माने जाते हैं। भाजपा से गठबंधन के बावजूद वह राजे के खिलाफ लगातार बयानबाजी करते रहे हैं। हाल में उपचुनाव के लिए गठबंधन से दो दिन पहले भी बेनीवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि राजे नहीं चाहेंगी कि गठबंधन हो, लेकिन भाजपा में कई लोग और मैं खुद गठबंधन चाहता हूं। अब गठबंधन नहीं हुआ तो मान लेना कि वसुंधरा राजे की पार्टी में चली है और हुआ समझ लेना कि नहीं चली।

दो दिन पहले के इस बयान के बावजूद पार्टी ने बेनीवाल को प्रदेश मुख्यालय बुलाया और प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया, उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी में गठबंधन की घोषणा की गई। इस बारे में आज जब मीडिया ने प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मजबूरी जैसी कोई बात नहीं है।राष्ट्रीय नेतृत्व भी चहता था और हमें भी लग रहा था कि वहां रालोपा का प्रत्याशी जीतने की स्थिति में है। इसलिए गठबंधन का फैसला किया। जहां तक बयानबाजी का सवाल है तो पार्टी के शीर्ष नेताओं का सभी सम्मान करते हैं और गठबंधन में सब कुछ शामिल है। भविष्य के लिए भी बेनीवाल को कहा है कि इस तरह की भाषा इस्तेमाल न करें।

दरअसल बेनीवाल का अपने गृह जिले नागौर में अच्छा प्रभाव है। इसके अलावा वह उत्तर पश्चिमी राजस्थान के जाट वोटों पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं। माना जाता है कि लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की बाड़मेर, जोधपुर, पाली जैसी सीटों पर बेनीवाल से गठबंधन कर भाजपा को फायदा हुआ है। इसके साथ ही इस गठबंधन को पार्टी की अंदरुनी राजनीति से जोड़ कर भी देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व राजस्थान में पार्टी को वसुंधरा राजे के प्रभाव से बाहर लाना चाहता है। हाल में पार्टी ने ज्यादातर उन्हीं नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी हैं, जिनकी किसी न किसी रूप में राजे से दूरिया रही हैं, फिर चाहे वह गजेंद्र सिंह शेखावत हो, ओम बिरला हों या हाल में अध्यक्ष बनाए गए सतीश पूनिया हों।

बड़ी ताकत बन कर उभरे

विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल राजस्थान में नई राजनीतिक ताकत बन कर उभरे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले बेनीवाल ने बाड़मेर, नागौर और जयपुर में बड़ी रैलियां कीं। भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे और बाद में खुद का दल बनाने वाले घनश्याम तिवाड़ी भी उनके साथ गठबंधन को आतुर नजर आए और दोनों दलों ने चुनाव में आधा-अधूरा गठबंधन किया भी, लेकिन जहां तिवाड़ी खुद अपनी जमानत नहीं बचा पाए, वहीं बेनीवाल न सिर्फ खुद जीते, बल्कि अपने दो विधायकों को और जिता लाए। पहली बार में बोतल चुनाव चिह्न वाली उनकी पार्टी 2.4 प्रतिशत वोट ले आई।

लोकसभा चुनाव में अपने मंत्री का टिकट काट कर बेनीवाल को दिया 

हनुमान बेनीवाल की ताकत को देखते हुए लोकसभा चुनाव में पहले कांग्रेस ने उनसे गठबंधन का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनी और अंत में भाजपा ने उन्हें नागौर की सीट दे दी। इस मामले में खास बात यह थी कि नागौर सीट से सांसद रहे सीआर चौधरी केंद्र की भाजपा सरकार में मंत्री थे और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नजदीकी लोगों में गिने जाते थे। लेकिन पार्टी ने उनका टिकट काटा और गठबंधन के तहत राजे के ही विरोधी बेनीवाल को दिया। बेनीवाल इस चुनाव में अच्छे वोटों से जीते और संसद में पहुंच गए। अब उनकी खाली हुई सीट खींवसर और झुंझुनू से सांसद बने नरेंद्र खींचड की सीट मंडावा पर उपचुनाव हो रहा है।

बेनीवाल ने अपने भाई को बनाया उम्मीदवार

राजस्थान में भाजपा के साथ गठबंधन कर विधानसभा का उपचुनाव लड़ रही राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने अपनी सीट खींवसर से अपने भाई नारायण लाल बेनीवाल को उम्मीदवार बनाया है। नारायण लाल 30 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।प्रदेश के नागौर जिले की खींवसर और झुंझुनू जिले की मंडावा सीट पर 21 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। खींवसर से विधायक बेनीवाल और मंडावा से विधायक नरेंद्र खींचड के लोकसभा में निर्वाचित होने के बाद ये दोनों सीटें खाली हो गई थीं। इस उपचुनाव में भाजपा और रालोपा गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं।

इसी के तहत खींवसर से रालोपा ने नारायण लाल बेनीवाल को उम्मीदवार बनाया है। हनुमान बेनीवाल के सांसद बनने के बाद से नारायण लाल इस सीट पर काफी सक्रिय थे और पार्टी का कामकाज भी देख रहे थे। मंडावा सीट पर भाजपा ने अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया का कहना है कि जल्द ही प्रत्याशी घोषित कर दिया जाएगा।

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Posted By: Sachin Mishra

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