मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बाद सरकारी कॉलेजों को भी दानदाता चाहिए। इसके लिए स्कूलों की तर्ज पर ही भामाशाह सहयोग योजना लागू की जा रही है। कॉलेजों से कहा गया है कि वे दानदाताओं से संपर्क कर कॉलेज की आवश्यकताओं के लिए सहायता जुटाएं। इसके लिए उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अलग लिंक भी दिया गया है।

राजस्थान में सरकारी स्कूलों में दानदाताओं के सहयोग से भूमि, भवन व अन्य आधारभूत सुविधाएं जुटाने की परंपरा कई वर्षों से है। स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षक दानदाताओं से संपर्क कर स्कूल के लिए सुविधाएं जुटाते हैं। सरकार भी इन दानदाताओं को भामाशाह के रूप में हर वर्ष एक राज्यस्तरीय समारोह में सम्मानित करती है। इसके अलावा दानदाताओं को प्रेरित करने वाले शिक्षकों को भी प्रेरक के रूप में सम्मानित किया जाता है। इस वर्ष 121 दानदाताओं ने 149.46 करोड़ रुपये सरकारी स्कूलों को दान दिए जो अब तक सर्वाधिक थे। इनमें बड़ी कार्पोरेट कंपनियां बड़ी संख्या में थीं जिन्होंने अपने कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसबिलिटी कोष में से स्कूलों को दान दिया था।

सरकारी स्कूलों को दान के रूप में मिली इस बड़ी सहायता को देखते हुए ही अब राजस्थान सरकार ने सरकारी कॉलेजों के लिए भी भामशाह सहयोग योजना लागू करने का निर्णय किया है। इस बारे में कॉलेज शिक्षा आयुक्त प्रदीप बोरड ने सभी सरकारी कॉलेजों के प्राचार्यों को निर्देश भेजे हैं। इसमें कहा गया है कि समाज को सरकारी कॉलेजों से जोड़ने के लिए सरकार यह योजना लागू कर रही है। कॉलेज प्राचार्य अपने कॉलेजों में एक नोडल अधिकारी नियुक्त कर अपने क्षेत्र में दानदाताओं, पूर्व छात्रों, वहां कार्यरत बड़ी कंपनियों व संस्थाओें आदि से संपर्क करें और कॉलेज में जिस सुविधा की जरूरत हो, उसके लिए सहायता प्राप्त करने का प्रयास करें। कॉलेजों में होने वाले हर कार्यक्रम में इस योजना का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए।

बोरड ने बताया कि इसके लिए पोर्टल पर एक लिंक भी बनाया गया है जहां कॉलेज की जरूरत, उसकी लागत और अन्य विवरण दिया जा सकता है ताकि दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठे लोग उसे देख सकें और कॉलेज के लिए सहायता मिल सके। हालांकि निर्देशों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दानदाताओं को स्कूलों की तरह सम्मानित किया जाएगा या नहीं। विभाग के सूत्रों का कहना है कि अभी इस योजना का रेस्पांस देखा जाएगा और यदि अच्छी सहायता मिलती है तो विभाग सम्मान समारोह के बारे में भी विचार करेगा।

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Posted By: Sachin Mishra

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