जागरण संवाददाता, जयपुर। सरकार की मंशा के अनुरूप काम नहीं करने वाले और भ्रष्ट पुलिस एवं प्रशासनिक सेवा के आधा दर्जन अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृति देने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के साथ ही ऐसे अफसरों की सूची तैयार की है, जो सरकारी कामकाज में दिलचस्पी नहीं लेते हैं।

इन अधिकारियों को तीन माह पूर्व अनौपचारिक रूप से सचेत किया गया था, लेकिन फिर भी इनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होने पर अब इन्हे जबरन सेवानिवृत करने की तैयारी की जा रही है। इनमें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के दो और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी शामिल है। इनके साथ ही राज्य प्रशासनिक सेवा के चार अधिकारियों को भी जबरन सेवानिवृत किए जाने की तैयारी है। इससे पहले दो आईपीएस अधिकारियों को सरकारी सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है।

13 तारीख को दागी अधिकारियों की सूची को मंजूरी मिलेगी

राज्य के कार्मिक विभाग के सूत्रों के अनुसार मुख्य सचिव,पुलिस महानिदेशक,कार्मिक सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर पर दागी अधिकारियों की अनौपचारिक सूची तैयार करने के बाद सीएम अशोक गहलोत के पास इसे भेजा गया था, उन्होंने भी इसे मंजूर कर दिया है। अब पुलिस सेवा के अयोग्य एवं भ्रष्ट अधिकारियों की छंटनी करने को लेकर 13 नवंबर को मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक होगी।

इस बैठक में राज्य के पुलिस महानिदेशक भूपेंद्र यादव, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, गुजरात की क्राइम ब्रांच के पुलिस महानिदेशक आशीष भाटिया और ऊर्जा विभाग के सचिव कुंजीलाल मीणा शामिल होंगे। इस बैठक में आईपीएस और आईएएस अयोग्य एवं भ्रष्ट अधिकारियों की सूची का अनुमोदन कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। इस बैठक में ऑल इंडिया सर्विस रूल्स 1958 की धारा 16(3) के तहत अधिकारियों की अधिकारिक सूची तैयार होगी। कार्मिक विभाग ने जबरन सेवानिवृति दिए जाने वाले अधिकारियों के नाम बताने से तो इन्कार किया, लेकिन प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा के आधा दर्जन अधिकारियों के नाम इस सूची में शामिल होने की बात अवश्य कही।

दो आईपीएस अधिकारी सेवानिवृत

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा भ्रष्ट एवं अक्षम अधिकारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाने के बाद राजस्थान सरकार ने भी दो आईपीएस अधिकारियों को सरकारी सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया है। इनमें 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी इंद्रभुषण और 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी शामिल है । राज्य सरकार ने इन दोनों अधिकारियों को सरकारी सेवा से हटाने को लेकर केंद्र से मंजूरी ली थी। भारतीय प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है। वहीं, राज्य के अधिकारियों को सरकार अपने स्तर पर सेवानिवृत कर सकती है।

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Posted By: Sachin Mishra

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