जयपुर, जागरण संवाददाता। Gehlot government. राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार सहकारिता के क्षेत्र में कांग्रेस की जड़ें मजबूत करने के लिहाज से प्रदेश की 25 हजार सहकारी संस्थाओं के चुनाव कराने की तैयारी में जुटी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना कांग्रेस के उन नेताओं के साथ रणनीति बनाने में जुटे हैं, जो पिछले कई साल से सहकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सहकारी संस्थाओं के साथ ही 144 कृषि उपज मंडियों के चुनाव भी होंगे। इसके लिए निर्वाचन प्राधिकरण बना दिया गया है।

सहकारी संस्थाओं और कृषि उपज मंडियों के चुनाव करा कर गहलोत सरकार एक तरफ तो कांग्रेस की जड़ें निचले स्तर तक मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं को चुनाव के माध्यम उपकृत करना चाहती है। सत्ता में होने के कारण चुनाव में कांग्रेस को चुनाव में लाभ मिलने की उम्मीद है। कई साल से सहकारी समितियों और कृषि उपज मंडियों के चुनाव नहीं हो सके हैं, इनमें अब तक अधिकारी प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 13 तरह की सहकारी समितियों के चुनाव प्राधिकरण कराएगा। प्रदेश में 24 हजार 676 सहकारी संस्थाएं पंजिकृत हैं। इनमें से 17 हजार 697 के चुनाव ड्यू हैं। इसके साथ ही 29 केंद्रीय सहकारी बैंकों के चुनाव होने हैं। वहीं, 28 भूमि विकास बैंकों और पांच हजार 907 ग्राम सेवा सहकारी समितियों, 212 क्रय-विक्रय सहकारी समितियों और 123 गृह निर्माण सहकारी समितियों के चुनाव कराए जाने हैं। ग्राम सेवा सहकारी समितियों का जाल गांव-गांव तक फैला हुआ है।

सहकारिता आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस का जाल गांव में फैलाने के लिहाज से कांग्रेस नेतृत्व ने जिला कांग्रेस कमेटियों व विधायकों को चुनाव की तैयारियों में जुटने के निर्देश दिए हैं। चुनाव की घोषणा अगले माह तक होने की संभावना है। पंचायत चुनाव से पहले सहकारी संस्थाओं के चुनाव कराए जा सकते हैं।

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Posted By: Sachin Mishra

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