जयपुर, जेएनएन। Financial Crisis. राजस्थान सरकार आर्थिक तंगी से जूझ रही है और इसके लिए केंद्र सरकार को भी जिम्मेदारी ठहरा रही है, लेकिन खुद सरकार की प्रशासनिक ढिलाई ऐसी है कि उसके 23 हजार 411 करोड़ की कर वसूली अटकी हुई है। यह राशि एक वर्ष से लेकर दस वर्ष से अधिक समय से अटकी हुई है। सरकार यह राशि वसूल करने में कामयाब हो जाए तो विकास के कार्य हो सकते हैं, क्योंकि यह राशि सरकार के चार प्रमुख विभागों के बजट प्रावधान के बराबर है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से गुरुवार को विधानसभा में पेश बजट दस्तावेजों में शामिल मध्यकालिक राजवित्तीय नीति विवरण, राजवित्तीय नीतियुक्त विवरण और प्रकटीकरण विवरण में सरकार की इस प्रशासनिक ढिलाई के आंकड़े दिए गए हैं। यह वह राशि है, जो सरकार को बिक्री कर, भू राजस्व, पंजीयन व मुद्रांक, अचल संपत्ति पर कर, वाहन कर, माल व यात्री कर, बिजली पर कर व शुल्क और वस्तुओं व सेवाओं पर अन्य कर व शुल्क के रूप में वसूलनी चाहिए थी। सरकार के संबंधित विभागों ने इस राशि की वसूली के नोटिस भी निकाले, लेकिन यह राशि वसूल नहीं की जा सकी। इसमें वह राशि भी शमिल है, जो विवादित या न्यायिक मामलों के कारण अटकी हुई है।

वित्त विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह काफी बड़ी राशि होती जा रही है और इसके पीछे एक बड़ा कारण विवाद और न्यायिक मामले हैं। सरकार के विभाग डिमांड नोटिस जारी करते हैं, लेकिन संबंधित व्यक्ति उसे विवादित बताते हुए कोर्ट में चला जाता है। इसके चलते यह पैसा अटक जाता है। इसके अलावा प्रशासनिक ढिलाई भी एक कारण है, जिसके चलते डिमांड नाोटिस जारी करने के बावजू पैसा अटका रहता है।

दस वर्ष से भी अधिक समय से अटकी है राशि

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2019 तक सरकार की यह अटकी हुई राशि 23411.41 करोड़ तक पहुंच चुकी थी। इसमें से 1477.94 करोड़ रुपये दस वर्ष से अधिक समय से और 2262.13 पांच से दस वर्ष की अवधि से तथा 7134.01 करोड़ रुपये दो से पांच वर्ष की अवधि से अटके हुए हैं। वहीं, लगभग आधी यानी करीब 12 हजार 500 करोड़ रुपये तो सिर्फ पिछले एक से दो वर्ष में अटके हैं।

सबसे ज्यादा राशि बिक्री कर

सरकार की ओर से की जाने वसूली में से सबसे ज्यादा 21 हजार 343 करोड़ रुपये की राशि बिक्री कर की है। यह विभाग राज्य सरकार के अधीन ही आता है। इस 21 हजार करोड़ में से 12 हजार करोड़ रुपये एक से दो वर्ष की अवधि यानी मौजूदा सरकार के बकाया है। इसके बाद दूसरे क्रम पर माल व यात्री कर है, जिसके 728 करोड़ रुपये की वसूली बकाया चल रही है।

चार प्रमुख विभागों के कुल बजट के बराबर है यह राशि

यह 23 हजार 411 करोड़ रुपये सरकार के नए बजट के चार प्रमुख विभागों कृषि (2488.77 करोड़), ग्रामीण विकास (11878 करोड़), सिंचाई (3620 करोड़) और परिवहन (6277 करोड़) के लिए किए गए बजटीय प्रावधान के लगभग बराबर है। यानी यह राशि वसूल हो जाए तो काफी कुछ किया जा सकता है।

इस कर का इतना है बकाया

भू-राजस्व-272.34

पंजीयन व मुद्रांक- 450.49

कृषि भूमि से भिन्न, अचल संपत्ति पर कर- 236.52

राज्य उत्पाद शुल्क- 201.42

बिक्री कर- 21343.82

वाहन कर- 53.21

माल व यात्री कर- 728.00

बिजली पर कर व शुल्क- 20.51

वस्तुओं और सेवाओं पर अन्य कर व शुल्क- 105.10

23411.41

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Posted By: Sachin Kumar Mishra

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