जयपुर, जेएनएन। राजस्थान के भीलवाडा जिले में एक लड़की ने अपने बाल विवाह को निरस्त कराने के लिए खुद लड़ाई लड़ कर मिसाल कायम की। पारोली की रहने वाली किशोरी ने बाल-विवाह प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई तो जन्म देने वाले माता-पिता तक बालिका के सामने खड़े हो गए। परिवार कोर्ट न्यायालय ने मामले में संज्ञान लेते हुए इस विभाग को शून्य घोषित कर दिया। अब बालिका का अगला विवाह जब भी होगा उसे पहला विवाह गिना जाएगा। भीलवाड़ा जिले के ग्राम पारोली की इस बालिका की लड़ाई बड़ी इसलिए बन गयी थी कि उसके परिवार ने भी उसका साथ ना खड़ा होकर उसके खिलाफ खड़ा रहा। परिवार से बेदखल कर दिये जाने के बाद बालिका अजमेर के नारी निकेतन में रहकर अपनी लड़ाई लड़ती रही। 

बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा सुमन त्रिवेदी ने बताया कि बालिका का विवाह 5 वर्ष की उम्र में ही हो गया था। अब जब वह 17 वर्ष की हो गयी है और ससुराल वाले उसे प्रताड़ित कर रहे थे। उसका मामला पारिवारिक न्यायालय में पेश किया। त्रिवेदी ने बताया कि मामले को न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए इस विवाह को शून्य कर दिया है। 

Posted By: Babita

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