उदयपुर, सुभाष शर्मा। कद्दू की खेती भी किसान का भाग्य चमका सकता है। इसे साबित किया है उदयपुर जिले के मेनार कस्बे के किसान रमेश चंद्र लुणावत ने। दस बीघा भूमि पर की गई खेती से उसकी किस्मत इस कदर बदली कि तीन महीने की मेहनत से उसने साढ़े तीन लाख रुपए का मुनाफा कमा लिया। अब मेनार और आसपास के किसान भी किसान रमेश की तरह उन्नत खेती कर अपनी किस्मत बदलने की कोशिशों में जुट गए हैं।

उदयपुर जिले की वल्लभनगर तहसील के मेनार गांव में किसान रमेश ने अप्रेल के अंतिम दिनों में कद्दू की फसल की बुबाई उन्नत तरीके से की। गर्मी में कम पानी के बीच कद्दू की फसल इस कदर फायदेमंद होगी, यह गांव के दूसरे किसानों को पता ही नहीं था। जबकि रमेश यह जानता था कि कद्दू की फसल के लिए हर सप्ताह सिंचाई की जरूरत होती है।

किसान रमेश का कहना है कि वह पिछले चार साल से कद्दू की खेती करता आया है और हर साल उसकी सफलता का प्रतिशत बढ़ता गया। साल 2016 में रमेश ने डेढ़ बीघा भूमि पर कद्दू की फसल बोया और उसे अच्छी आमदनी हुई। इसके बाद हर साल वह फसल का ऐरिया बढ़ाता गया। इस साल उसने दस बीघा भूमि में फसल बोई थी। पिछले दो सप्ताह से बड़ी तादाद में कद्दू बेचकर उसकी प्रतिदिन हजारों रुपए की आमदनी हुई। रमेश के मुताबिक एक बीघा भूमि पर पचास से साठ क्विंटल कद्दू की पैदावार ली जा सकती है।

रमेश अब तक दो सौ क्विंटल से अधिक कद्दू बेच चुके हैं थोक बाजार में कद्दू का पांच से नौ रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है। अभी आधी से अधिक भूमि से ही फसल ली है। उसका मानना है कि अभी उसके खेतों से तीन सौ क्विंटल कद्दू और मिलेंगे।

सौदे की खेती

किसान रमेश बताते हैं कि कद्दू की खेती बेहद सौदे की है। इसे हर सप्ताह सिंचाई की जरूरत होती है। बारिश में किसान का यह काम कम पड़ जाता है। पौध तैयार होने के बाद फसल लेने तक अधिकतम तीन-चार बार ही निराई-गुड़ाई करनी होती है। दो से ढाई महीने में उपज मिलने लगती है। प्रति बीघा साठ क्विंटल तक फसल ली जा सकती है और इस तरह एक बीघे में उपज से लगभग तीस हजार रुपए की आमदनी निश्चित है।

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Posted By: Preeti jha

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