जयपुर, जागरण संवाददाता। जम्मू-कश्मीर में दो आतंकियों द्वारा राजस्थान के भरतपुर जिले के उभाका गांव निवासी ट्रक चालक शरीफ खान की हत्या और हमले का चश्मदीद गवाह इकराम खान बुधवार सुबह सामने आया। इकराम खान ट्रक पर शरीफ खान के साथ सहायक के रूप में रहता था। इकराम खान बुधवार सुबह मेव समाज के पंचों के पास पहुंचा।

इकराम खान ने वहां मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि सोमवार रात को शरीफ खान एवं मैं खाना खाने के बाद सोने जा रहे थे, तभी दो आतंकियों ने हमला कर दिया। इकराम खान ने बताया कि कश्मीर के शोपियां जिले के सिंधु श्रीमाल में जिस समय दो आतंकियों ने गोली मारकर शरीफ खान की हत्या की उस वक्त वह उसके साथ था। उसने बताया कि खाना खाने के बाद मैं तो ट्रक के अंदर सोने आ गया और शरीफ खान बाहर खड़ा होकर मोबाइल से अपने घर बात कर रहा था। इसी बीच दो आतंकी ट्रक के पास आए और शरीफ खान पर हमला कर दिया। शरीफ खान जोर से मदद के लिए चिल्लाया, इसी बीच आतंकियों ने उसका मोबाइल फोन छीन लिया ।

इकराम खान ने बताया कि आवाज सुनकर मैं ट्रक से बाहर आया तो एक आतंकी ने मुझे भी पकड़ लिया और वापस ट्रक के पिछले हिस्से में फेंक दिया। शरीफ खान को भी जबरन ट्रक में बिठा दिया। दोनों आतंकियों ने शरीफ खान से ट्रक चलाने को कहा, वह इसके लिए तैयार नहीं हुआ तो उसके बायें कान पर बंदूक लगा दी। इकराम ने बताया कि इसी बीच मैं ट्रक के पीछे से कूद कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए नजदीक ही एक बस्ती में पहुंच गया। वहां एक किसान के घर में जाकर छिप गया। कुछ ही सैंकड में गोलियों की आवाज सुनाई दी। करीब आधा घंटे बाद वह किसान के घर से बाहर निकल कर ट्रक के पास पहुंचा तो पुलिस के जवान सड़क पर खड़े नजर आए। उसने पुलिसकर्मियों से शरीफ खान के बारे में पूछा तो वे उसे भी अपने साथ पुलिस थाने ले गए।

पुलिस थाने में जमीन पर शरीफ खान का शव पड़ था। पुलिस थाने से उसने घटना की जानकारी ट्रक मालिक हरियाणा के काठपुरी निवासी रूकमुद्दीन को दी। पुलिस ने पूछताछ के बाद मंगलवार को उसे अपने गांव भेज दिया। शरीफ खान और इकराम खान सोमवार सुबह ही सिंधु श्रीमाल सेब लेने गए थे। इकराम खान हरियाणा निवासी है।

मेवात के लोग पहुंचे शरीफ खान के गांव

राजस्थान के अलावा हरियाणा और उत्तरप्रदेश से मेवात इलाके के लोगों का मंगलवार शाम से ही मृतक शरीफ खान के गांव उभाका पहुंचाना शुरू हो गया था। बुधवार को भी मेव समाज के काफी लोग वहां पहुंचे। मंगलवार रात लोगों ने कुछ देर के लिए हाईवे जाम किया। लोग शरीफ खान को शहीद का दर्जा और उसके परिजनों को 50 लाख रूपए का मुआवजा देने की मांग कर रहे थे, हालांकि प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप के बाद लोगों को हाईवे से हटवा दिया था। पहाड़ी के तहसीलदार जगदीश आर्य शरीफ खान का दिल्ली से शव लेकर बुधवार सुबह उभाका गांव पहुंचे तो वहां कोहराम मच गया। एक बार तो ग्रामीणों ने शव लेने से ही इंकार कर दिया था। हालांकि बाद में वे शव लेने को तैयार हुए।

गरीबी के कारण बेटी ने छोड़ दी थी पढ़ाई

मृतक शरीफ खान के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब होने के कारण उसकी बड़ी बेटी तस्लीमा ने आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी थी। उसकी दूसरे नंबर की बेटी मुस्कान चौथी और तीसरी बेटी बुसरा दूसरी कक्षा में पढ़ती है। तीन बेटियों के अलावा परिवार में माता-पिता और पत्नी है। भरतपुर जिला कलेक्टर जोगाराम ने बताया कि सरकार की तरफ से मृतक के परिवार को पूरी मदद दी जाएगी। 

Posted By: Preeti jha

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