नई दिल्ली, प्रेट्र। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक से धोखाधड़ी के एक मामले में राजस्थान की कंपनी की 52 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क (अटैच) की है। यह संपत्ति राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में स्थित विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड की है। इसके निदेशक बीडी अग्रवाल और बिमला देवी हैं। ईडी की इस कार्रवाई से प्रदेशभर में हड़कंप मच गया है।

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत एक अस्थायी आदेश जारी किया गया था। इसके तहत कंपनी के श्रीगंगानगर और बीकानेर स्थित 27 कृषि और औद्योगिक भूखंड, प्लांट, मशीनरी कुर्क करने को कहा गया था। कुर्क की गई संपत्ति का कुल मूल्य 52.21 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई सीबीआइ की ओर से कंपनी, इसके निदेशकों और स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (अब एसबीआइ) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एक मामले में की गई है। जांच में सामने आया कि विकास डब्ल्यूएसपी लिमिटेड ने फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर बैंक से एक्सपोर्ट पैकिंग क्रेडिट (ईपीसी) सुविधा हासिल कर ली थी और बैंक के समक्ष अपना दावा सही साबित करने के लिए फर्जी बिल प्रस्तुत किए थे।

निदेशालय के अनुसार, बैंक ने बाद में फर्जी लेटर ऑफ क्रेडिट के आधार पर ईपीसी की सीमा को बढ़ा भी दिया। यह सीमा फॉरेन बैकिंग नेगोशिएटिंग लेटर ऑफ क्रेडिट (एफबीएनएलसी) योजना के तहत बढ़ाई गई। इसके अलावा एफपीबी योजना के तहत 36 विदेशी बिल जुटा लिए। कंपनी ने निर्यात की गई उन वस्तुओं पर ईपीसी का फायदा उठाया जो या तो उस समय के दौरान बनाई ही नहीं गई या कंपनी की फैक्ट्री में पड़ी थीं। इसके लिए निर्यात के फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए। कंपनी द्वारा उठाई ईपीसी का उपयोग बाद में अचल संपत्तियां खरीदने और कंपनी के रोजमर्रा के खर्च उठाने के लिए किया गया। मामले की जांच-पड़ताल चल रही है। ईडी की कार्रवाई के दौरान काफी पुलिस बल भी मौके पर मौजूद था।

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Posted By: Sachin Mishra

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