अजमेर, संवाद सूत्र। राजस्थान में अजमेर के जिला पुलिस अधीक्षक जगदीशचन्द्र शर्मा ने बताया कि नशीली दवाओं का फरार कारोबारी श्याम सुंदर मूंदड़ा 11 जून की रात पकड़ा गया। मूदंडा को नागौर जिले के मेड़ता की एक होटल से गिरफ्तार किया गया। अदालत ने उसे पांच दिन के रिमांड पर सौंपा है। मूंदड़ा की गिरफ्तारी के बाद अजमेर, जोधपुर, पाली, चूरू, नागौर, भीलवाड़ा के कई मेडिकल स्टोर संचालक भूमिगत हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मूंदड़ा की गिरफ्तारी के लिए दक्षिण क्षेत्र के डीएसपी मुकेश सोनी के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। इस टीम मेें अजमेर शहर के तीन थानों क्लॉक टावर, अलवर गेट और रामगंज के थाना अधिकारियों के साथ-साथ जिला पुलिस की स्पेशल टीम को शामिल किया गया।

संयुक्त प्रयास के बाद ही मूंदड़ा की गिरफ्तारी हुई है। टीम में शामिल सभी सदस्यों को पुरस्कार व प्रशंसा पत्र दिया जाएगा। उन्होंने माना कि 15 करोड़ रुपये की नशीली दवाइयों की बरामदगी के बाद मुख्य आरोपित श्याम मूंदड़ा की गिरफ्तारी पुलिस के चुनौती थी। अजमेर में जब 24 मई को करीब सवा पांच करोड़ रुपये की नशीली दवाइयां ट्रांसपोर्ट नगर से जब्त की गई थी, तभी से मूंदड़ा फरार चल रहा था। मूंदड़ा की फरारी के बाद ही पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया, जो सभी श्रमिक प्रवृत्ति के थे। लेकिन सभी ने इस बात को माना कि नशीली दवाइयों को मंगाने और फिर इधर उधर भेजने में मूंदड़ा की ही भूमिका थी।

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद मूंदड़ा ने जो प्राथमिक जानकारी दी है, उसके अनुसार नशीली दवाइयां अजमेर से ज्यादा जोधपुर, पाली, चूरू, नागौर, भीलवाड़ा आदि शहरों में सप्लाई की गई है। पुलिस अब उन सभी लोगों की पहचान कर रही है, जिन्होंने मूंदड़ा से प्रतिबंधित नशीली दवाइयां खरीदी हैं। असल में नशीली दवाइयां उत्तराखंड की हिमालय मेडिटेक कंपनी से जयपुर में रम्या फर्मा तक आती थी। निर्माता कंपनी से रम्या फर्मा तक बिल के अनुरूप माल की सप्लाई होती थी, लेकिन जयपुर के बाद श्याम सुंदर मूंदड़ा जैसे दवा कारोबारी नशीली दवाइयों को गलत तरीके से बेचते थे।

अजमेर पुलिस ने भी जयपुर पुलिस की सूचना के बाद करीब 11 करोड़ रुपये की नशीली गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन बरामद किए थे। जानकार सूत्रों के अनुसार, ऐसी दवाइयों पर पहले ही एमआरपी पर 40 प्रतिशत तक का कमीशन होता है, लेकिन मूंदड़ा जैसे कारोबारी इन नशीली दवाइयों को एमआरपी से दोगुनी-तीगुनी कीमत पर अवैध तरीके से बेचते थे। इससे मुनाफे का अंदाजा लगाया जा सकता है। मूंदड़ा की गिरफ्तारी के बाद संबंधित शहरों के मेडिकल स्टोर संचालकों में खलबली मच गई है। नशीली दवाइयां अधिकांश तौर पर मेडिकल स्टोरों के माध्यम से ही बेची जाती हैं। पुलिस ने 12 जून को मूंदड़ा को न्यायालय में प्रस्तुत कर पांच दिनों के रिमांड पर लिया है। 

Edited By: Sachin Kumar Mishra