जयपुर, मनीष गोधा। राजस्थान में सरकार 'स्वास्थ्य का अधिकार कानून'लागू करने की तैयारी कर रही है। सरकार के अनुरोध पर कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं इस कानून का मसौदा तैयार कर रही हैं। इसमें घर से आधा घंटे की दूरी पर अस्पताल, मरीजों को अपने इलाज के बारे में सब कुछ जानने का अधिकार और निजी अस्पतालों पर कड़े नियमन की बात कही जा रही है। मसौदा अभी तैयार हो रहा है। दो-तीन माह में इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव के समय कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में स्वास्थ्य का अधिकार लागू करने का वादा कर चुकी है। इस वादे को अमल में लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस क्षेत्र में काम कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं को इस कानून का मसौदा तैयार करने का काम सौंपा है। मसौदा तैयार करने के लिए अब तक दो कार्यशालाएं हो चुकी हैं और काफी हद तक मसौदा तैयार कर भी लिया गया है। जनस्वास्थ्य अभियान से जुड़ी छाया पंचैली का कहना है कि अगले दो-तीन माह में हम इस मसौदे को सार्वजनिक कर देंगे। सरकार इसे लेकर काफी गंभीरता से काम कर रही है।

पंचैली ने बताया जनस्वास्थ्य अभियान काफी समय से स्वास्थ्य का अधिकार कानून लागू करने की मांग कर रहा था। हमने विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों से इस बात का आग्रह किया था कि इस कानून का वादा वो अपने घोषणा पत्र में करें। कांग्रेस ने इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल किया और अब सरकार बनने के बाद इस वादे पर काम भी शुरू कर दिया गया है। देश में अभी किसी भी राज्य में स्वास्थ्य का अधिकार कानून लागू नहीं है। यह कानून लागू करने वाला राजस्थान पहला राज्य होगा। राजस्थान में नि: शुल्क दवा योजना और नि: शुल्क जांच योजना पहले से ही चल रही है। ऐसे में राजस्थान में इस कानून को लागू करने के लिए आदर्श स्थितियां हैं।

पंचैली ने बताया कि हमारी कोशिश है कि कानून ऐसा हो, जिसे लागू करने के बाद लोगों को आसानी से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसे देखते हुए कानून में मरीजों, डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है। इस बात की व्यवस्था भी की जा रही है कि कानून का पालन न होने की स्थिति में ब्लॉक से लेकर राज्य स्तर तक शिकायत करने और उस पर कार्रवाई की व्यवस्था कायम हो।

ये प्रावधान किए जा रहे हैं

-हर व्यक्ति को उसके निवास से आधा घंटे की दूरी पर मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं और डेढ़ से दो घंटे की दूरी पर प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा मिल सके।

-मरीजों को यह जानने का पूरा अधिकार हो कि उसे क्या उपचार दिया जा रहा है। वह अपनी जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज आसानी से प्राा कर सके।

-स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक मानव संसाधन का उचित वितरण हो ताकि सभी को प्रशिक्षित मानव संसाधन से स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

-नि:शुल्क जांच व दवा जैसी योजनाएं जारी रहें और इन्हें और बेहतर बनाया जाए।

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Posted By: Sachin Mishra