जयपुर, नरेन्द्र शर्मा। Rani Padmini. रानी पद्मनी और महाराणा प्रताप को लेकर राजस्थान में एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। विवाद इस हद तक बढ़ गया कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक दीपेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं होगी। वहीं, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने भी नाराजगी जताई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं कक्षा की पुस्तक "राजस्थान की संस्कृति और इतिहास" के पेज नंबर 9 में रानी पद्मनी के बारे में साहित्यकार मलिक मुहम्मद जायसी का हवाला देते हुए लिखा गया है कि मुगल बादशाह अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मनी को पाने के लिए चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था।

वहीं, महाराणा प्रताप पर देश में पीएचडी करने वाले देश के एकमात्र साहित्यकार डॉ. चन्द्रशेखर का कहना है कि मलिक मुहम्मद जायसी के संदर्भ को जोड़ना गलत है। वहीं, राजस्थान के पुराने इतिहासकार एवं पूर्व राजपरिवारों के सदस्यों के साथ ही राजपूत समाज का कहना है कि अलाउद्दीन खिलजी ने राजपूताने में अपना वर्चस्व कायम करने व चित्तौड़गढ़ की सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाने के लिए आक्रमण किया था। उधर, 10वीं कक्षा की ही सामाजिक विज्ञान की पुस्तक से महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध के जीतने के बारे में तथ्यों को हटाने पर भी नाराजगी है। इसमें लिखा गया कि महाराणा प्रताप हल्दीघाटी में अकबर के खिलाफ लड़े गए युद्ध नहीं जीत पाए थे। साल, 2017 से पहले माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की पुस्तक में पढ़ाया जाता था कि हल्दीघाटी युद्ध अकबर ने जीता था, लेकिन पिछली वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में पाठ्क्रम में बदलाव किया गया और लिखा गया कि महाराणा प्रताप की सेना ने अकबर की सेना पर जीत प्राप्त की थी।

राजनेताओं व पूर्व राजपरिवारों ने जताई नाराजगी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दीपेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा कि इतिहास से किसी तरह की छेड़छाड़ बर्दास्त करने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि 10वीं कक्षा की इतिहास की पुस्तक के अध्याय दो में महाराणा प्रताप से जुड़ी सामग्री में बदलाव कर अकबर की सेना के असफलता सिद्ध करने वाले तथ्य हटाए गए हैं। हल्दीघाटी युद्ध के कई तथ्य बदले गए हैं। जयपुर राजपरिवार की पूर्व सदस्य एवं भाजपा सांसद दीयाकुमारी एवं उदयपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि महाराणा प्रताप के जीवन के तथ्यों का गलत उल्लेख करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पाठ्क्रम में कुछ समय पहले ही बदलाव किए गए थे, फिर राज्य सरकार ने जल्दबाजी में बिना तथ्य जांच क्यों बदलाव किए हैं। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटािरया ने भी महाराणा प्रताप व रानी पद्मनी से जुड़े तथ्यों में कांट-छांट पर नाराजगी जताई है।

पहले भी हुआ था विवाद

उल्लेखनीय है कि साल, 2018 में फिल्म "पद्मावत" की शूटिंग के दौरान फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ राजपूत करणी सेना ने जयपुर के आमेर महल में मारपीट की थी। उनकी यूनिट के कई सदस्यों के साथ मारपीट की गई थी। राजपूत समाज सहित कई संगठनों ने कई दिनों तक आंदोलन किया था। इनका आरोप था कि भंसाली अपनी फिल्म पद्मावत में रानी पद्मनी का गलत चित्रण कर रहे हैं। 

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