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राजस्थान में 'देवरानी-जेठानी' की जंग में बाजी मार गई कांग्रेस, कैसे पारिवारिक जंग ने दिलाई 1 वोट से जीत?

Published: Sat, 26 Sep 2026 08:18 PM (IST)

खाटू श्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में देवरानी-जेठानी की राजनीतिक लड़ाई और अपहरण के आरोपों के बीच कांग्रेस की विनीता ...और पढ़ें

पारिवारिक ड्रामे के बीच कांग्रेस ने एक वोट से मारी बाजी

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डिजिटल डेस्क, जयपुर। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल खाटू श्यामजी की नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव एक हाई-वोल्टेज पारिवारिक ड्रामे का केंद्र बन गया। देवरानी-जेठानी की आपसी राजनीतिक लड़ाई, वोटिंग के दिन पार्षद के गायब होने पर अपहरण के आरोप और राजस्थान हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार इस दिलचस्प चुनावी मुकाबले का फैसला हुआ।

बेहद कड़े मुकाबले में महज एक वोट के अंतर से कांग्रेस उम्मीदवार विनीता पुनिया ने जीत हासिल कर नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमाया।

जोड़-तोड़ की राजनीति

खाटू श्यामजी की 20 सदस्यों वाली नगर पालिका में बहुमत का आंकड़ा 11 था। चुनाव नतीजों के बाद स्थिति बेहद दिलचस्प हो गई थी, क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों के पास 8-8 पार्षद थे।

सदन में तीन निर्दलीय और एक राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) का पार्षद शामिल था। कांग्रेस ने RLP के इकलौते पार्षद का समर्थन हासिल कर अपनी संख्या 9 कर ली, जबकि बीजेपी ने प्रेम देवी को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा।

देवरानी-जेठानी की जंग और ड्रामा

राजनीतिक मुकाबला तब पारिवारिक ड्रामे में बदल गया, जब बीजेपी उम्मीदवार प्रेम देवी के सामने कांग्रेस से उनकी देवरानी लक्ष्मी देवी का मामला आ गया। लक्ष्मी देवी का परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। बीजेपी को उम्मीद थी कि पारिवारिक रिश्तों के चलते लक्ष्मी देवी अपनी जेठानी प्रेम देवी के पक्ष में कॉस वोटिंग कर सकती हैं।

तनाव तब बढ़ा जब 21 सितंबर को वोटिंग के दिन लक्ष्मी देवी वोट डालने नहीं पहुंची। उनके पति हरलाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी पत्नी का अपहरण कर लिया गया है। बीजेपी और लक्ष्मी देवी के परिजनों ने चुनाव टालने की मांग की।

इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य चुनाव आयोग ने मतदान की प्रक्रिया को 25 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया।

हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

चुनाव स्थगित होने के फैसले को कांग्रेस उम्मीदवार विनीता पुनिया ने राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी। उनके वकील बहादुर सिंह ने अदालत में तर्क दिया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए 100 प्रतिशत मतदान अनिवार्य नहीं है। केवल अपहरण की शिकायत दर्ज होने से यह साबित नहीं होता कि वास्तव में अपराध हुआ है, इसलिए चुनाव परिणाम वास्तव में पड़े 19 वोटों के आधार पर ही घोषित किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने कांग्रेस के तर्क को स्वीकार करते हुए पड़े हुए 19 वोटों के आधार पर ही परिणाम घोषित करने के निर्देश दिए। शनिवार को जब वोटों की गिनती हुई, तो कांग्रेस की विनीता पुनिया को 10 वोट मिले, जबकि बीजेपी की प्रेम देवी को 9 वोट मिले।

महज एक वोट से कांग्रेस की विनीता पुनिया ने जीत दर्ज की।