जागरण संवाददाता, जयपुर। सीबीआई मामलों की विशेष अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट ने गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 को जाम करने के मामले में राजस्थान सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग को खुलवाने के लिए प्रशासन को आंसू गैस का उपयोग करना पड़ा था, लेकिन फिर भी रास्ता नहीं खुला था। ऐसी घटनाएं देश में दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं और इससे दूसरे नागरिकों के अधिकारों का हनन होता है। दरअसल, राज्य सरकार ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा कि वह जनहित में इस मुकदमे को वापस लेना चाहती है, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।

मामले के अनुसार 31 मई, 2007 को आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर समाज की ओर से आंदोलन किया गया था। जिसके चलते प्रदेश भर में आंदोलन हुआ था। चंदवाजी पुलिस थाना इलाके में एनएच 8 को जाम करने के इस मामले में 18 आरोपितों के खिलाफ ट्रायल चल रही है। राज्य सरकार की ओर से इन आरोपियों को राहत देते हुए मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगी गई थी।

गुर्जर समुदाय लगातार कर रहा मांग

गुर्जर समुदाय सरकार से आरक्षण की मांगो को लेकर पिछले काफी वक्त से नाराज चल रहा है। जुलाई में जयपुर में हुई पीएम मोदी की यात्रा से पहले भी गुर्जर समुदाय ने पीएम की यात्रा का विरोध करने का फैसला किया था। हालांकि, 2 मांगों पर सहमति बनने के बाद गुर्जर समुदाय शांत हो गया था, जिसके बाद से आरक्षण को लेकर लगातार दिए जा रहे सरकार के आश्वासन से परेशान हो कर गुर्जर समुदाय एक बार फिर विरोध के लिए उतर रहा है।

सीएम की यात्रा के विरोध की घोषणा

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह ने शुक्रवार को दौसा में एक प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि गुर्जर समाज के साथ सरकार अन्याय कर रही है। गुर्जर समाज मुख्यमंत्री की राजस्थान गौरव यात्रा का विरोध करेगा। गुर्जर बहुल जिलों में यात्रा नहीं निकलने दी जाएगी।  

By Sachin Mishra