जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान में कांग्रेस अभी सत्ता से काफी दूर है। 200 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में वर्तमान में कांग्रेस के मात्र 24 विधायक है। कांग्रेसी नेता व्यक्तिगत बातचीत में मानते है कि देश में अभी भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू बरकरार होने के कारण पार्टी को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव सत्ता तक पहुंचने में काफी मुश्किल होगी। लेकिन इसी बीच कांग्रेसी नेताओं में टिकट को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। खींचतान और तकरार सड़कों पर आने लगी है।

ऐसा ही एक वाकया गुरूवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में नजर आया। यहां पूर्व मंत्री बाबूलाल नागर के सैंकड़ों समर्थक प्रदेश कांगे्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट से मिलने पहुंचे,लेकिन वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इस पर नागर समर्थकों ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव प्रारम्भ कर दिया।

नागर समर्थकों ने जमकर हंगामा किया,इनका आरोप था कि सचिन पायलट के खास और पूर्व मंत्री भंवर लाल मेघवाल दूदू विधानसभा क्षेत्र से अपनी बेटी बनारसी मेघवाल को टिकट दिलवाना चाहते है,जबकि नागर यहां से दो बार विधायक रह चुके और अभी भी सक्रिय है। नागर समर्थक हंगामा कर ही रहे थे कि इसी बीच भंवर लाल मेघवाल प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में जाने के लिए कुछ दूर वाहन से उतरे तो नागर समर्थकों ने उन्हे घेरकर धक्का-मुक्की प्रारम्भ कर दी।

इसी दौरान मेघवाल के भी कुछ समर्थक मौके पर पहुंच गए और उन्होंने नागर के खिलाफ नारेबाजी की। हंगामे के बीच नागर और मेघवाल के बीच तकरार भी हुई। हंगामा इतना बढ़ा कि प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के आसपास दुकानें बंद हो गई,सड़क से गुजर रहे लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा। मेघवाल को भी एक दुकान में घुसकर अपनी जान बचानी पड़ी।

सूचना पर विधायकपुरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मेघवाल को दुकान से बाहर निकालकर सुरक्षित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के अंदर पहुंचाया। हंगामा बढ़ता देख प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कार्यकर्ताओं को समझाने पहुंचे और उन्होंने काफी मशक्कत के बाद नागर समर्थकों को शांत कराया। उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास समर्थक बाबूलाल नागर पूर्व में मंत्री रहे है।

दुष्कर्म के आरोप में वे तीन वर्ष तक जेल में रहे,इस कारण पार्टी ने उन्हे निलम्बित कर दिया था। कुछ समय पूर्व ही कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था,इसके बाद से वे कांग्रेस की राजनीति में फिर से सक्रिय हो रहे है,हालांकि अधिकारिक रूप से उनकी कांग्रेस में अभी तक वापसी नहीं हुई है।

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