नरेन्द्र शर्मा, जयपुर। देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप काफी समय से लगता रहा है । समय-समय पर कांग्रेसी नेता इसका जवाब भी देने की कोशिश करते नजर आए हैं, लेकिन वंशवाद की बेल को काटना कभी भी संभव नहीं हो सका है। पार्टी ने इससे पार पाने के लिए नई नीति भी अपनाई। कहा, टिकट सर्वे के मुताबिक तय होगी, न किसी वंशवाद के हिसाब से। बावजूद इसके राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की विरासत संभालने के लिए युवा पीढ़ी तैयार खड़ी है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस वंशवाद या नई नीति में किसे अपनाएगी।

विधानसभा चुनाव में दो दर्जन से अधिक नेताओं के पुत्र और पुत्रियां टिकट की दावेदारी जताने में अभी से जुट गए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे ने यह तो साफ कर दिया कि पार्टी जिताऊ उम्मीदवार को टिकट देगी, लेकिन नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट देने की बात पर कोई साफ जवाब नहीं दिया। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट यह साफ कर चुके हैं कि विधानसभा चुनाव के लिए टिकट का कोई निश्चित फॉर्मूला तय नहीं किया गया है, केवल साफ छवि वाले युवा और जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट दिया जाएगा। टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त पर नजर डालें तो एक लंबी सूची उन नामों की है, जो राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगे हैं। दो दर्जन से अधिक नेताओं के पुत्र-पुत्रियों और अन्य रिश्तेदार टिकट की मांग कर रहे हैं। यह सूची इस बार इसलिए भी लंबी हो चली है, क्योंकि कांग्रेसी नेताओं को सत्ता विरोधी लहर के चलते सरकार बनने पूरी उम्मीद है।

अशोक गहलोत सहित कई दिग्गजों के बेटे-बेटियां टिकट की दौड़ में

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत सवाई माधोपुर और टोंक विधानसभा सीटों से टिकट मांग रहे हैं । दिग्गज नेता नारायण सिंह की पुत्रवधु रीटा चौधरी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.अबरार अहमद के बेटे दानिश अबरार, गुजरात की पूर्व राज्यपाल कमला बेनीवाल के पुत्र आलोक, बिहार के पूर्व राज्यपाल जग्गनाथ पहाड़यिा के पुत्र संजय, पीसीसी के उपाध्यक्ष भंवर लाल मेघवाल स्वयं के साथ अपनी पुत्री बनारसी के लिए भी टिकट मांग रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.नवल किशोर शर्मा के पुत्र बृज किशोर शर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व.शीशराम ओला के पुत्र बृजेन्द्र ओला सहित कई नेताओं के पुत्र-पुत्रियां और रिश्तेदार कांग्रेस के टिकट की कतार में लगे हैं।

दावेदारों ने कहा, आरोप गलत

वंशवाद के आरोपों पर टिकट के दावेदारों का कहना है कि आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर डॉक्टर का बेटा डॉक्टर और इंजीनियर का बेटा इंजीनियर बन सकता है तो राजनेता का बेटा राजनेता क्यों नहीं बन सकता? यह ठीक है कि टिकट की दावेदारी आसान हो जाती है लेकिन अंतत: फैसला जनता को तय करना होता है।

Posted By: Sachin Mishra