जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के सरकारी स्कूलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी ) के तहत संचालित करने के निर्णय के विरोध में स्वर उठने लगे हैं। राज्य में सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे के अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने इस निर्णय के विरोध का नया तरीका खोजा है। अभिभावक और छात्र-छात्राएं पिछले दो दिन से अपना सरकारी स्कूल बचाने के लिए "चिपको आंदोलन" चला रहे हैं ।

इसके तहत ये सभी स्कूल की दीवारों के चिपक कर सरकार के निर्णय पर विरोध जता रहे हैं। ये सभी बारी-बारी से स्कूल की दीवारों पर चिपक कर विरोध जता रहे हैं। इनका कहना है कि वे वर्ष 1974 में पेड़ों को बचाने के लिए चलाए गए "चिपको आंदोलन" की तर्ज पर अपना आंदोलन चला रहे हैं। स्कूल की दीवारों से चिपक कर सरकारी  स्कूल में आस्था जताने वालों में शिक्षक भी शामिल है। फतेहपुर व्यापार मंडल के रामदेव सिंह और युवा मंच के    महेन्द्र ढ़ाका का कहना है कि सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई हो रही है,फिर इन्हे पीपीपी मोड़ पर क्यों दिया जा रहा है।

इनका कहना है कि फतेहपुर पंचायत समिति के तहत आने वाली सभी सरकारी स्कूलों में चिपको आंदोलन चलाया जा रहा है। यदि सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला तो अगले माह से सीकर जिला कलेक्ट्रेट पर चिपको आंदोलन चलाया जाएगा। अभिभावक और छात्र-छात्राएं कलेक्ट्रेट की दीवारों पर चिपक कर अपना विरोध दर्ज करवाएंगे और फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो जयपुर में शासन सचिवालय तक यह आंदोलन ले जाया जाएगा ।

पूर्व मंत्री एवं फतेहपुर के पूर्व विधायक अश्क अली टांक ने स्कूलों को पीपीपी मोड़ पर दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वर्ष 1974 में सुंदरलाल बहुगुणा ने पेड़ों को बचाने के लिए चिपको आंदोलन चलाया था और यहां के लोग अपना स्कूल बचाने के लिए उसी तर्ज पर आंदोलन कर रहे हैं । 

Posted By: Preeti jha

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